बाल विवाह मुक्त पंचायत की दिशा में कबीरधाम की 100 पंचायतों ने लिया संकल्प
“सही उम्र, पूरी पढ़ाई, सुरक्षित मन” विषय पर जिला स्तरीय सरपंच कार्यशाला आयोजित
कवर्धा।। बाल विवाह की रोकथाम, बाल संरक्षण, लैंगिक हिंसा की रोकथाम, बालिकाओं की शिक्षा तथा मानसिक स्वास्थ्य के प्रति पंचायत प्रतिनिधियों एवं समुदाय को जागरूक करने के उद्देश्य से “बाल विवाह मुक्त पंचायत का संकल्प” विषय पर एक दिवसीय जिला स्तरीय सरपंच कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का मुख्य संदेश “सही उम्र, पूरी पढ़ाई, सुरक्षित मन” रहा।
इस जिला स्तरीय कार्यशाला का आयोजन छत्तीसगढ़ एग्रीकॉन समिति एवं जिला प्रशासन कबीरधाम द्वारा महिला एवं बाल विकास विभाग, Educate Girls एवं UNICEF के सहयोग से किया गया। कार्यशाला में जिले की 100 पंचायतों के सरपंचगण, छत्तीसगढ़ एग्रीकॉन समिति के सदस्य, महिला एवं बाल विकास विभाग की टीम, KAVIR Volunteers तथा संबंधित प्रतिनिधियों ने सहभागिता की।
महापुरुषों एवं भारत माता के चित्र पर माल्यार्पण के साथ हुआ शुभारंभ
कार्यक्रम की शुरुआत सरपंचगण, महिला एवं बाल विकास विभाग तथा छत्तीसगढ़ एग्रीकॉन समिति की टीम द्वारा महापुरुषों एवं भारत माता के चित्र पर पूजा-अर्चना एवं माल्यार्पण के साथ की गई। इसके पश्चात कार्यशाला के उद्देश्य एवं दिनभर आयोजित होने वाले विभिन्न सत्रों की जानकारी प्रतिभागियों को दी गई।
बैलून एक्टिविटी से समझाया बच्चों की सुरक्षा और देखभाल का महत्व
कार्यशाला के प्रथम सत्र की शुरुआत प्रशिक्षक विनोद साहू द्वारा की गई। “बचपन नहीं रुकना चाहिए” विषय पर आयोजित इस सत्र में बैलून एक्टिविटी के माध्यम से बच्चों के बचपन, सुरक्षा, देखभाल और संरक्षण के महत्व को रोचक तरीके से समझाया गया।
उन्होंने बताया कि बच्चों को परिवार एवं अभिभावकों की देखभाल, सुरक्षा और सकारात्मक मार्गदर्शन की आवश्यकता होती है। उचित देखभाल एवं संरक्षण से दूर होने पर बच्चों और किशोरों के गलत आदतों तथा नशे जैसी गतिविधियों की ओर जाने का जोखिम बढ़ सकता है। इसलिए परिवार, समुदाय और पंचायत की जिम्मेदारी है कि बच्चों को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराया जाए और उन्हें सही दिशा में आगे बढ़ने के अवसर मिलें।
सत्र में बच्चों एवं किशोरों की पहचान, उनकी आवश्यकताओं तथा उनके संरक्षण से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं पर भी चर्चा की गई।
बाल संरक्षण एवं बाल विवाह प्रतिषेध कानून की दी गई जानकारी
द्वितीय सत्र में कांति साहू, महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा बाल संरक्षण एवं बाल विवाह के विषय पर जानकारी दी गई। उन्होंने बताया कि 0 से 18 वर्ष तक की आयु के बच्चों को बालक एवं बालिका की श्रेणी में रखा जाता है।
उन्होंने बाल संरक्षण से संबंधित विभिन्न योजनाओं एवं सेवाओं की जानकारी देते हुए बताया कि किन परिस्थितियों में बच्चों को विभागीय संरक्षण एवं सहायता उपलब्ध कराई जाती है। कार्यशाला में बाल गृह, बालिका गृह एवं दत्तक गृह जैसी संस्थाओं के उद्देश्य, उनकी उपयोगिता तथा पात्र बच्चों के संबंध में भी जानकारी साझा की गई।
दत्तक ग्रहण से संबंधित जानकारी देते हुए बताया गया कि अब तक 60 बच्चों को दत्तक गृह के माध्यम से गोद लिया जा चुका है।
सत्र में बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, 2006 के प्रावधानों पर भी चर्चा हुई। बाल विवाह क्या है, बाल विवाह से जुड़े विभिन्न पहलू तथा इसके सामाजिक, शैक्षणिक एवं स्वास्थ्य संबंधी दुष्परिणामों के बारे में जानकारी दी गई। विशेष रूप से कम उम्र में गर्भधारण से होने वाले स्वास्थ्य संबंधी जोखिमों के प्रति जागरूक किया गया। इसके साथ चाईल्ड हेल्पलाइन नंबर 1098 की भी जानकारी दी गई ।
“पढ़ाई छूटी है, भविष्य नहीं” — बालिका शिक्षा पर दिया जोर
तृतीय सत्र में प्रदीप, राज्य समन्वयक, Educate Girls द्वारा “पढ़ाई छूटी है, भविष्य नहीं” विषय पर बालिका शिक्षा को केंद्र में रखते हुए चर्चा की गई।
उन्होंने बताया कि शिक्षा बालिकाओं और महिलाओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का महत्वपूर्ण माध्यम है। शिक्षा से बालिकाओं को अपने अधिकारों को समझने, आत्मविश्वास बढ़ाने और भविष्य में बेहतर अवसर प्राप्त करने में सहायता मिलती है।
उन्होंने Educate Girls द्वारा बालिकाओं की शिक्षा के लिए किए जा रहे कार्यों की जानकारी भी साझा की। उन्होंने कहा कि किसी कारणवश यदि किसी बालिका या महिला की पढ़ाई छूट गई है, तो उसके भविष्य के अवसर समाप्त नहीं होते। परिस्थितियों के अनुसार आगे भी शिक्षा से जुड़ने के अवसर तलाशे जा सकते हैं।
सत्र में महिलाओं की शिक्षा के महत्व पर भी चर्चा हुई। महिलाओं की शिक्षा को बच्चों की बेहतर परवरिश, आर्थिक स्वतंत्रता, परिवार में अपनी बात रखने, हिंसा का विरोध करने तथा परिवार और समाज में सकारात्मक पीढ़ीगत बदलाव का महत्वपूर्ण आधार बताया गया।
वर्ष 2029 तक बाल विवाह मुक्त छत्तीसगढ़ की दिशा में प्रयास
चतुर्थ सत्र में चंचल यादव, महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा बाल विवाह की वर्तमान स्थिति एवं इसकी रोकथाम के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर जानकारी दी गई।
उन्होंने बताया कि वर्ष 2029 तक छत्तीसगढ़ को बाल विवाह मुक्त बनाने का संकल्प लिया गया है। उनके द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, पूर्व सर्वेक्षण में प्रदेश में बाल विवाह का स्तर लगभग 30 प्रतिशत बताया गया था, जो नए सर्वेक्षण के अनुसार लगभग 12 प्रतिशत तक आया है।
उन्होंने कहा कि बाल विवाह जैसी सामाजिक कुप्रथा को समाप्त करने के लिए केवल किसी एक विभाग का प्रयास पर्याप्त नहीं है। पंचायत प्रतिनिधियों, प्रशासन, महिला एवं बाल विकास विभाग, समुदाय, स्वयंसेवकों एवं सामाजिक संगठनों को मिलकर लगातार जागरूकता और सामुदायिक सहभागिता के साथ कार्य करना होगा।
“अब चुप्पी नहीं” — महिला हिंसा के खिलाफ जागरूकता
पांचवें सत्र में नीतिका डड़सेना, प्रभारी सखी वन स्टॉप सेंटर एवं महिला संरक्षण अधिकारी, कवर्धा द्वारा “अब चुप्पी नहीं” विषय पर महिला सशक्तिकरण, महिला हिंसा, बाल विवाह एवं महिलाओं के अधिकारों से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी दी गई।
उन्होंने महिलाओं एवं बालिकाओं के साथ होने वाली हिंसा के खिलाफ आवाज उठाने और समस्याओं पर खुलकर संवाद करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि जागरूकता और शिक्षा महिलाओं को अपने अधिकारों को समझने तथा हिंसा के खिलाफ आवाज उठाने में मदद करती है।
सत्र के दौरान सखी वन स्टॉप सेंटर के माध्यम से महिलाओं को उपलब्ध सहायता, संरक्षण एवं संबंधित कानूनी प्रावधानों के बारे में भी जानकारी साझा की गई।
मानसिक स्वास्थ्य पर हुआ विशेष सत्र
कार्यशाला के एक अन्य महत्वपूर्ण सत्र में अंजलि शर्मा जी, छत्तीसगढ़ एग्रीकॉन समिति द्वारा मानसिक स्वास्थ्य पर संवाद किया गया।
इस दौरान प्रतिभागियों को अपने मन की बात साझा करने, भावनाओं को समझने तथा मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने के तरीकों पर चर्चा कराई गई। मानसिक तनाव एवं मानसिक स्वास्थ्य से संबंधित सामान्य संकेतों को पहचानने तथा सकारात्मक तरीके से उनका सामना करने के उपायों पर जानकारी साझा की गई।
सत्र का उद्देश्य प्रतिभागियों को यह समझाना था कि मानसिक स्वास्थ्य भी शारीरिक स्वास्थ्य की तरह महत्वपूर्ण है और समय पर संवाद, सहयोग एवं उचित सहायता लेना आवश्यक है।
सरपंचों ने साझा किए विचार, लिया बाल विवाह रोकने का संकल्प
कार्यशाला के अंतिम चरण में जिले की विभिन्न पंचायतों से आए सरपंचों ने अपने विचार एवं अनुभव साझा किए। सरपंचों ने सभी सत्रों में सक्रिय सहभागिता दिखाई और बाल विवाह, बालिका शिक्षा, महिला हिंसा, बाल संरक्षण तथा मानसिक स्वास्थ्य जैसे विषयों को पंचायत स्तर पर चर्चा एवं कार्रवाई से जोड़ने में रुचि व्यक्त की।
सरपंचों ने कार्यशाला के आयोजन एवं महत्वपूर्ण विषयों पर जागरूकता प्रदान करने के लिए प्रशिक्षकों तथा आयोजन टीम का धन्यवाद ज्ञापित किया।
कार्यशाला के समापन अवसर पर सभी सरपंचों एवं उपस्थित प्रतिभागियों ने बाल विवाह रोकने की शपथ ली। इसके साथ ही “संकल्प की दीवार” पर प्रतिभागियों ने अपनी प्रतिबद्धता लिखकर पर्चियां चिपकाईं और बाल विवाह मुक्त पंचायत की दिशा में सामूहिक संकल्प व्यक्त किया।
जिला एवं संस्था के प्रतिनिधियों की रही उपस्थिति
कार्यशाला में छत्तीसगढ़ एग्रीकॉन समिति के प्रमुख मानस बनर्जी, मनीषा मोटवानी (CHiRP कार्यक्रम समन्वय), अदृजा, नितेश चंदेल सहित महिला एवं बाल विकास विभाग, एग्रीकॉन समिति, KAVIR Volunteers एवं संबंधित टीम के सदस्य उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का संचालन दीपक बागरी, जिला कार्यक्रम समन्वयक, कबीरधाम द्वारा किया गया।
पंचायतों की भूमिका महत्वपूर्ण
कार्यशाला के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि बाल विवाह की रोकथाम केवल कानून लागू करने तक सीमित विषय नहीं है, बल्कि यह बाल संरक्षण, बालिका शिक्षा, महिला सशक्तिकरण, स्वास्थ्य, मानसिक स्वास्थ्य और सामुदायिक जागरूकता से जुड़ा व्यापक सामाजिक मुद्दा है।
पंचायतें समुदाय के सबसे नजदीक की स्थानीय संस्थाएं होने के कारण बाल विवाह की रोकथाम, स्कूल से बाहर बच्चों एवं बालिकाओं की पहचान, परिवारों से संवाद, जागरूकता गतिविधियों तथा जरूरतमंद बच्चों एवं महिलाओं को संबंधित सेवाओं से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।
“सही उम्र, पूरी पढ़ाई, सुरक्षित मन” के संदेश के साथ आयोजित इस कार्यशाला ने बाल विवाह मुक्त पंचायत की दिशा में सामूहिक जिम्मेदारी एवं सहभागिता का संदेश दिया।


