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एक्स रिपोर्टर न्यूज़ । राजनांदगांव

सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र छुरिया में हुए ₹7,28,610 के बैक डेट भोजन बिल भुगतान वित्तीय अनियमितता मामले मे एक नया मोड़ आ गया है। जांच के नाम पर की गई लीपापोती और दोषियों को आनन-फानन में बांटी गई ‘क्लीन चिट’ के खिलाफ 27 जुलाई 2026 को मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी को नया पत्र सौंपकर इस पूरे मामले की ‘री-इन्वेस्टिगेशन’ (पुनः जांच) की आधिकारिक मांग की गई है। इस मांग के बाद से जिला स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप मच गया है।

Health reporter@राजनांदगांव: छुरिया CHC बैक डेट बिलिंग वित्तीय अनियमितता मामले में महा-लीपापोती, बिना शिकायतकर्ता के बयान के बना दी जांच रिपोर्ट और दे दी ‘क्लीन चिट’…

री-इन्वेस्टिगेशन की मांग क्यों? जांच टीम की खुली मनमानी आई सामने
शिकायतकर्ता ने अपनी नई शिकायत में साफ कर दिया है कि 15 जुलाई 2026 को विभाग द्वारा जारी की गई जांच रिपोर्ट पूरी तरह से एकतरफा, अन्यायपूर्ण और असंतोषजनक है। री-इन्वेस्टिगेशन की मांग के पीछे मुख्य रूप से दो बेहद मजबूत और तकनीकी आधार रखे गए हैं, जिसका जवाब देते अब विभाग से नहीं बन रहा है:

शिकायतकर्ता का बयान ही गायब: किसी भी वैध प्रशासनिक या कानूनी जांच का पहला नियम होता है कि शिकायतकर्ता को बुलाकर उसका पक्ष और सबूत दर्ज किए जाएं। लेकिन इस मामले में जांच दल ने शिकायतकर्ता पत्रकार का बयान दर्ज करने की जहमत तक नहीं उठाई। बंद कमरे में बैठकर बनाई गई इस रिपोर्ट ने खुद जांच दल की निष्पक्षता को कटघरे में खड़ा कर दिया है।

कलेक्टर अनुमति के मुख्य सबूत को छुपाया: मूल शिकायत का मुख्य तकनीकी आधार यह था कि वित्तीय वर्ष 2023-24 के पुराने बिलों का भुगतान बिना पूर्व कलेक्टर या संचालक की अनुमति के नियम विरुद्ध तरीके से किया गया। जांच दल ने इस मुख्य बिंदु को पूरी तरह दरकिनार कर दिया। री-इन्वेस्टिगेशन की मांग में सीधा सवाल दागा गया है कि यदि भुगतान वैध था, तो जांच दल ने वह शासकीय गाइडलाइन रिपोर्ट में सार्वजनिक क्यों नहीं की?

रिटायरमेंट से पहले फाइल बंद करने की ‘डील’ का शक

इस पूरे मामले में री-इन्वेस्टिगेशन की मांग इसलिए भी बेहद संवेदनशील हो गई है क्योंकि इस मामले से जुड़ा कर्मचारी अपने रिटायरमेंट के बिल्कुल करीब है। आरोप है कि कर्मचारी को सुरक्षित सेवानिवृत्ति दिलाने, उसकी पेंशन और ग्रेजुएटी को फंसने से बचाने के लिए ही विभागीय अधिकारियों के संरक्षण में यह “क्लीन चिट” की स्क्रिप्ट लिखी गई थी। शिकायतकर्ता ने नए पत्र में स्पष्ट कहा है कि मामले का अंतिम और निष्पक्ष निराकरण संबंधित कर्मचारी के रिटायरमेंट से पहले ही किया जाना सुनिश्चित हो।

निष्पक्ष जांच न होने पर उच्च स्तर पर शिकायत की तैयारी

सौंपे गए कड़े शिकायती पत्र के बाद राजनांदगांव स्वास्थ्य विभाग की फजीहत तय मानी जा रही है। शिकायतकर्ता ने साफ कर दिया है कि अगर इस बार भी री-इन्वेस्टिगेशन में निष्पक्षता नहीं बरती गई और पूरे दस्तावेजों को सार्वजनिक नहीं किया गया, तो इस प्रशासनिक सांठगांठ की शिकायत सीधे राज्य शासन से की जाएगी।
अब देखना यह होगा राजनांदगांव का जिला प्रशासन इस खुले वित्तीय भ्रष्टाचार पर दोबारा निष्पक्ष री-इन्वेस्टिगेशन कराता है या अपने भ्रष्ट तंत्र को बचाने का खेल जारी रखता है।

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