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एक्स रिपोर्टर न्यूज़ । राजनांदगांव

जिले के आबकारी विभाग में कथित अनियमितताओं और अवैध वसूली के आरोपों ने प्रशासनिक तंत्र में हलचल मचा दी है। विभाग में लंबे समय से पदस्थ बाबू रामसिंह पाटिल पर शराब दुकानों के संचालन से जुड़े कर्मचारियों से दबाव बनाकर वसूली करने, मनमाने तरीके से स्थानांतरण करने और विभागीय कार्यप्रणाली को प्रभावित करने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। लिखित शिकायत पर से विभागीय जांच शुरू हो चुकी है। बयान लेने के लिए शिकायतकर्ता से पत्राचार किया गया है। अब देखना यह है कि इस मामले में विभाग निष्पक्ष जांच करता है कि नहीं।

City reporter@राजनांदगांव: आबकारी विभाग में लंबे समय से जमे बाबू रामसिंह पाटिल को हटाने की मांग, जोगी युवा मोर्चा ने सौंपा ज्ञापन, शराब की ओवर रेटिंग, कमीशनबाजी और कोचियागिरी को संरक्षण देने का लगाया आरोप…

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, विभिन्न दुकानों के सुपरवाइजर और सेल्समैन लगातार मानसिक दबाव में काम करने को मजबूर हैं। आरोप है कि उन्हें बार-बार बुलाकर धमकाया जाता है और अवैध रूप से पैसों की मांग की जाती है। कई कर्मचारियों ने नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर बताया कि बिना किसी स्पष्ट कारण के उन्हें एक स्थान से दूसरे स्थान पर भेज दिया जाता है, जिससे कार्य में अस्थिरता और असंतोष बढ़ रहा है। कभी मंदिर बनाने के नाम पर तो कभी ज्योत जलाने के नाम पर 11-11 हजार रूपए कि अवैध वसूली की जा रही है। मामले में लोकेशन इंचार्ज साहिल वर्मा की भूमिका पर भी सीधे सवाल उठाए जा रहे हैं। सूत्रों के अनुसार वे भी कथित तौर पर पाटिल के निर्देशों के अनुसार ही कार्य कर रहे हैं। इससे विभाग के अन्य कर्मचारियों में असहजता का माहौल बना हुआ है और कोई भी खुलकर अपनी बात रखने से बच रहा है। स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा है कि इन गतिविधियों का प्रभाव जिले के आबकारी राजस्व पर भी पड़ रहा है। इनके संरक्षण मे शहर के बाहरी क्षेत्रों मे और डोंगरगांव डोंगरगढ़ जैसे इलाकों मे लगातार शराब की नदियां बह रही है जिससे अवैध और अव्यवस्थित कार्यप्रणाली के चलते राजस्व संग्रह में भी गिरावट आने की संभावना है। गौरतलब है कि इससे पहले भी बाबू रामसिंह पाटिल पर ओवररेटिंग, कमीशनखोरी और अवैध गतिविधियों को संरक्षण देने जैसे आरोप लग चुके हैं। हाल ही में सामने आई शिकायतों और वायरल ऑडियो के बाद मामला और गंभीर हो गया है। प्रशासन ने मामले को संज्ञान में लेते हुए जांच के आदेश दीए हैं। संबंधित पक्षों को बयान दर्ज कराने के लिए नोटिस जारी किए गए हैं। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी तरह निष्पक्ष होगी और दोषी पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। अब जिलेवासियों और कर्मचारियों की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जांच के बाद क्या बाबू रामसिंह पाटिल पर निलंबन या बर्खास्तगी जैसी कार्रवाई होती है या नहीं। फिलहाल, यह मामला प्रशासन की पारदर्शिता और जवाबदेही की परीक्षा का विषय बन गया है।

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