एक्स रिपोर्टर न्यूज़ । राजनांदगांव
लगातार सुर्खियों में आ रहे राजनांदगांव आबकारी विभाग के कारनामें थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। अधिकारी कर्मचारियों की मनमानी ने विभागीय कार्यप्रणाली पर प्रश्न चिन्ह लगा दिया है। अबकी बार जो जानकारी सामने आई है वो तो और गजब है। बीते वर्ष में अवैध कार्यों की वजह से जिन प्लेसमेंट एजेंसी के कर्मियों को बाहर का रास्ता दिखाकर ब्लैक लिस्ट किया गया था, विभागीय अधिकारी उन्हीं कर्मियों को दोबारा जॉब पर वापसी करा रहे हैं। जबकि नियमानुसार जिन कर्मियों को ब्लैक लिस्टेड किया गया है उन्हें दोबारा जॉब पर नहीं रखा जा सकता है। जॉब दिलाने के एवज में रुपए लेनदेन को लेकर कल जो ऑडियो सामने आया था उसमें जिस प्लेसमेंट कर्मी की ऑडियो रिकार्डिंग थी उसे प्लेसमेंट एजेंसी ने ब्लैक लिस्ट कर रखा है, फिर भी उस कर्मी की काम पर वापसी हो गई। ऐसा लगता है कि जिस तरह ब्लैक मनी को व्हाइट किया जाता है, उसी तरह ब्लैकलिस्टेड एम्पलाई को व्हाइट करने के लिए आबकारी विभाग ने लॉन्ड्री सेटअप जमा रखा है।
मिली जानकारी अनुसार प्लेसमेंट एजेंसी ने बीते वर्ष में कुल 29 कर्मियों को ब्लैक लिस्ट किया था। अधिकांश कर्मियों को शराब दुकान के राजस्व में माईनस यानी नुकसान करने एवं शराब पीकर काम पर आने की वजह से ब्लैक लिस्ट किया गया था। इसके अलावा समय-समय पर औचक निरीक्षण के दौरान आबकारी उड़नदस्ता दल ने कार्रवाई कर प्लेसमेंट कर्मियों को ब्लैक लिस्ट करवाया था। उड़नदस्ता दल के औचक निरीक्षण के दौरान प्लेसमेंट कर्मी शराब की ओवर रेटिंग करते हुए पकड़ाए थे। अवैध कार्य करने वाले ऐसे कर्मियों को वापस जॉब पर रखवाना आबकारी विभाग के अधिकारी-कर्मचारी की कार्यप्रणाली को संदिग्ध बना रहा है। महत्वपूर्ण सवाल यह है कि आखिर ब्लैक लिस्टेड कर्मियों को दोबारा काम पर रखकर विभागीय अमले को कैसे और किस तरह फायदा मिलने वाला है। मामला गंभीर है, प्रशासन को इसकी जांच करानी चाहिए। जांच में चौकाने वाले तथ्यों का खुलासा हो सकता है।
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