एक्स रिपोर्टर न्यूज । राजनांदगांव
जिला मुख्यालय सहित आसपास के ग्रामीण अंचलों में शराब का अवैध कारोबार तेजी से फल-फूल रहा है। जिसमें खास तौर पर युवा वर्ग शराब एवं अन्य नशीली वस्तुओं के मकड़जाल में फंसता जा रहा है। गांव-गांव में आसानी से अवैध रूप से शराब बिकने से गांव का युवा वर्ग इसकी चपेट में आ रहा है। तमाम शिकायतों के बावजूद आबकारी विभाग मौन है। उधर पुलिसिया कार्रवाई से खुलासें हो रहे हैं कि कोचियों को शासकीय दुकानों से ही शराब की खेप मिल रही है। जबकि राज्य सरकार ने शराब कारोबार को इसलिए शासकीय हाथों में लिया था ताकि अवैध कारोबार पर लगाम लगाया जा सके, लेकिन यहां तो उल्टी गंगा बह रही है।
इस कृत्य से न सिर्फ विभागीय कार्यप्रणाली पर ऊंगली उठ रही है बल्कि राज्य सरकार की किरकिरी भी हो रही है।
शनिवार (07 फरवरी 2026) को लालबाग थाना पुलिस की ओर से की गई कार्रवाई में इस खेल का सटिक प्रमाण मिला है। जानकारी अनुसार दिनांक 07.02.2026 को मुखबीर से सूचना मिली कि मोपेड क्र0 CG24U/0250 से दो व्यक्ति शराब भट्ठी से अवैध रूप से भारी मात्रा में शराब लेकर बायपास रोड से रेवाडीह से ट्रांसपोर्ट नगर चौक की तरफ आ रहे हैं। नाकाबंदी कर मोपेड को रोका गया। आरोपी मनीष पिता निर्मल तेजवानी उम्र 30 साल निवासी नंदई चौक एवं भागवत प्रसाद पिता स्व0 चंद्रिका प्रसाद तिवारी उम्र 58 सा. निवासी ग्राम कोहका के कब्जे से 40 पौवा शोले देशी प्लेन शराब एवं 30 पौवा स्पेशल गोवा व्हीस्की अंग्रेजी शराब कुल 12.600 बल्क लीटर जब्त किया गया। शराब की यह खेप शासकीय दुकान से खरीदकर ले जाई जा रही थी, मतलब साफ है शासकीय दुकान ही शराब के अवैध कारोबार को बढ़ावा दे रहे हैं। आपकों बता दें कि प्रत्येक शासकीय शराब दुकान की निगरानी का जिम्मा आबकारी विभाग के अधिकारियों को दिया गया है। उनकी जानकारी के अभाव में शराब की अवैध खेफ निकलना असंभव है, यही वजह है कि अवैध कारोबार के मामले में आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में है।
वर्षों से एक ही जगह जमे हुए कर्मचारी
जानकारी अनुसार आबकारी विभाग के जिला कार्यालय में कई कर्मचारी वर्षों से जमे हुए है। नियमानुसार तीन वर्षों के बाद कर्मचारियों का स्थानांतरण किया जाना अनिवार्य है। लेकिन आबकारी विभाग में ऐसा नहीं है। आरोप है कि यहां वर्षों से जमे कर्मचारियों के इशारें पर प्लेसमेंट कंपनी के कर्मियों के जरिए शराब के अवैध कारोबार का विस्तार किया जा रहा है। यह जानकारी अधिकारियों को भी है लेकिन वे कर्मचारियों पर कार्रवाई करने से बच रहे है। इससे कर्मचारियों के हौसले और बुलंद हो चले है।
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