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फोटो- पीड़िता विद्या सागोड़े

✍️ लाला कर्णकान्त श्रीवास्तव

एक्स रिपोर्टर न्यूज़ । राजनांदगांव

एक सप्ताह के अल्टीमेटम के विरुद्ध लगभग 95 दिनों बाद आखिरकार संजीवनी हॉस्पिटल Vs विद्या सांगोड़े मामले की प्रदेश स्तरीय जांच रिपोर्ट आ चुकी है। यह रिपोर्ट 15 दिन पहले ही आ गई थी लेकिन स्वास्थ्य विभाग द्वारा रिपोर्ट को सार्वजनिक करने में टालमटोल किया जा रहा था। यहां तक कि इस रिपोर्ट की जानकारी शिकायतकर्ता को भी नहीं दी गई थी। सप्ताह भर से लगातार संपर्क करने के बाद अन्ततः गुरुवार को सीएमएचओ डॉ. एनआर नवरतन ने रिपोर्ट और उसके निष्कर्ष की जानकारी हमसे साझा की। डॉ. नवरतन के अनुसार प्रदेश स्तरीय जांच में एक बार फिर संजीवनी हॉस्पिटल प्रबंधन को क्लीन चिट दी गई है।

Health reporter@राजनांदगांव: संजीवनी हॉस्पिटल VS विद्या सागोड़े मामला; दो दिनों का मिला था आश्वासन पर अब तक नहीं आई राज्य स्तरीय जांच रिपोर्ट, बार-बार दस्तावेजों में कमी बताकर टाला जा रहा किडनी ट्रांसप्लांट ऑपरेशन…

इससे पहले जिला स्तरीय जांच रिपोर्ट में भी संजीवनी हॉस्पिटल को क्लीन चिट दे दी गई थी। लेकिन इस बार जांच कमेटी ने निर्णय लिया है कि अस्पताल में भर्ती रहने के दौरान किए गए इलाज खर्च के बदले अस्पताल प्रबंधन 5 गुना राशि पीड़ित पक्ष को बतौर मुआवजा लौटाएगी। इस पर जल्द अमल करने को कहा गया है। लेकिन संजीवनी अस्पताल प्रबंधन इस निर्णय के भी विरोध में है। प्रबंधन की ओर से निर्णय को खारिज करवाने के लिए मंत्रालय में पत्राचार किया गया है। अब आगे देखना होगा कि मुख्यालय के आला अफसर इस पर क्या फैसला देते हैं?
इधर पीड़ित विद्या की हालत अभी भी नाजुक बनी हुई है। लीगल पेपर के सबमिशन के बाद भी किडनी ट्रांसप्लांट के लिए काफी लंबा इंतजार पीड़ित पक्ष को भारी पड़ रहा है। रायपुर के निजी अस्पताल में विद्या का किडनी ट्रांसप्लांट ऑपरेशन किया जाना है। लेकिन ऑपरेशन से पहले दस्तावेज और जांच की लंबी प्रक्रिया ने पीड़ित के परिजनों को परेशानी में डाल रखा है। आपातकालीन स्थिति को देखते हुए भी प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी ऑपरेशन को जल्द से जल्द करवाने के लिए तनिक भी प्रयास नहीं कर रहे हैं। जो प्रशासनिक तत्परता पर सवाल खड़े कर रहा है।

बड़ा सवाल: जब दोषी नहीं तो मुआवजा का निर्णय क्यों? जांच पर संदेह

प्रदेश स्तरीय जांच रिपोर्ट में संजीवनी हॉस्पिटल को डिलीवरी के दौरान किसी भी तरह की गड़बड़ी नहीं करने को लेकर क्लीन चिट दे दी गई है। फिर भी मुआवजा देने के लिए कहा गया है। यहां पर सवाल यह है कि जब प्रबंधन ने कोई गड़बड़ी की ही नहीं है तो वह मुआवजा क्यों दे? यहां पर मुआवजा देने कहा जा रहा है यानि मामले में प्रबंधन की कहीं ना कहीं चूक है? ऐसे में इस जांच रिपोर्ट पर भी संदेह के बादल मंडराने लगे हैं। शिकायतकर्ता व पीड़िता के पति रितेश सांगोड़े ने आरोप लगाते हुए कहा कि प्रदेश स्तरीय तहकीकात में भी पक्षपात किया गया है। वे इस मामले को न्यायालय में ले जाएंगे।

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