कर्णकान्त श्रीवास्तव
एक्स रिपोर्टर न्यूज़ । राजनांदगांव
6.26 करोड़ रुपए की लागत से बीते महीनों में कराए गए पार्रीनाला-मोहारा-ट्रांसपोर्ट नगर बायपास मजबूतीकरण कार्य में चंद्रमा की सतह की तरह बड़े-बड़े गड्ढे उभर आए है। सीधे कहे तो यह पूरा प्रोजेक्ट ही गड्ढा है। जहां करोड़ों रुपए पानी की तरह बहा दिए गए और हासिल आया शून्य। मजूबतीकरण कार्य होने के बावजूद पार्रीनाला से ट्रांसपोर्ट नगर तक बायपास के तीनों ब्रिज के अगल-बगल से गुजरे सर्विस लेन अभी भी जर्जर स्थिति में है। जिस पर लोग जान हथेली पर लेकर चलने को मजबूर है, क्योंकि यहां बड़े-बड़े जानलेवा गड्ढों से आए दिन दुर्घटनाएं होती रहती है। यही नहीं निर्माण के कई महीनों बाद तक सड़क के किनारे शोल्डर का काम ही नहीं किया गया था, सड़क की ऊंचाई अधिक होने से आए दिन यहां गंभीर हादसे होते ही रहते थे। अब जब पोल खुलने लगी है तब ठेका कंपनी आनन फानन में शोल्डर का काम करवा रहा है, इसमें भी मुरूम की जगह मिट्टी डाला जा रहा है, वो भी बगल से खोदकर। ये तो सच में अंधेरगर्दी है।
सूचना का अधिकार के तहत लोक निर्माण विभाग, राजनांदगांव से प्राप्त दस्तावेजो में कई महत्वपूर्ण तथ्यों का खुलासा हुआ है। साथ ही बायपास का सिलसिलेवार मुआयना करने पर कई बिंदु निकलकर सामने आए है। प्राप्त दस्तावेज के मुताबिक 11.6 किलोमीटर लंबे बायपास के मजबूतीकरण का ठेका फरवरी 2023 में सेवा सिंह ओबराय एंड कंपनी, दुर्ग को दिया गया था। ठेका कंपनी को कार्य पूरा करने के लिए 4 महीने का समय दिया गया था। ठेका कंपनी ने बड़ी फूर्ती से बारिश से पहले ही काम पूरा कर लिया। लेकिन ब्रिज के नीचे अगल-बगल में सर्विस लेन को अधूरा छोड़ दिया, जहां मजबूतीकरण की सर्वाधिक जरुरत थी। बता दें कि आवागमन के लिए सर्विस लेन का अधिक इस्तेमाल किया जाता है। वर्तमान में सर्विस लेन में बड़े-बड़े जानलेवा गड्ढे है जो दुर्घटना को खुला आमंत्रण दे रहे है।
निर्माण के साथ ही करना था शोल्डर का काम
एक्सपर्ट की माने तो मजबूतीकरण कार्य के चलते सड़क की ऊंचाई बढ़ जाती है। ऐसे में सड़क के दोनों किनारो को मुरूम से भरकर रोड रोलर अच्छी तरह चलाया जाता है, ताकि वाहनों को सड़क से उतरने में किसी तरह की दिक्कत न हो और राहगिर दुर्घटना से बचे रहे। इसे ही शोल्डर कहा जाता है। लेकिन यहां ठेका कंपनी ने मनमानी करते हुए कई महीनों तक शोल्डर का काम नहीं किया, ऐसे में बायपास में कई दुर्घटनाए हो गई और लोग गंभीर रूप से जख्मी हो गए। मीडिया के समक्ष मामला आने के बाद हाल ही में ठेका कंपनी ने शोल्डर का काम करवाया, जो थूक पॉलिस ही है। कायदे से दूसरे स्थान से मुरूम मंगवाकर शोल्डर कराना था, लेकिन ठेका कंपनी ने पैसा बचाने के चक्कर में बायपास किनारे से मिट्टी निकालकर शोल्डर कर दिया, रोड रोलर भी नहीं चलाया।
स्टीमेट में 6 प्रतिशत डामर का अनुपात, फिर भी उखड़ गई बजरी
लोक निर्माण विभाग से प्राप्त स्टीमेट के अनुसार बायपास मजबूतीकरण कार्य में ठेका कंपनी को 6 प्रतिशत डामर के अनुपात में डामरीकरण करना था। इस हिसाब से डामरीकरण काफी मजबूत होता है, लेकिन यहां तो उल्टी गंगा बह रही है। मजबूतीकरण को कुछ महीने ही हुए है और डामरीकरण की मजबूती जवाब दे गई। बजरी छनकर बाहर सड़क पर फैल गई है। जिसे हाथ से उठाकर आसानी से देखा जा सकता है। विशेषकर ब्रिज में यह स्थिति आम है। हमारी पड़ताल के दौरान फरहद चौक ब्रिज में यह स्थिति नजर आई जिसे हमने टाइम और डेट के साथ मोबाइल के कैमरे में कैप्चर किया।
ठेका कंपनी और पीडब्ल्यूडी इंजीनियर की मिलीभगत तय
करोड़ों रुपए के बायपास मजबूतीकरण कार्य का ऐसा हश्र ठेका कंपनी और पीडब्ल्यूडी इंजीनियर की मिलीभगत की ओर साफ इशारा कर रहा है। इस तरह के मनमानीपूर्ण कार्य से यह बिलकुल स्पष्ट है कि पीडब्ल्यूडी इंजीनियर ने निर्माण के दौरान बायपास का निरीक्षण नहीं किया और आंख मूंदकर बिल पर हस्ताक्षर कर दिए। इस मामले को लेकर विभाग के जिम्मेदार अधिकारी भी ठीक तरह से जवाब नहीं दे पा रहे है। गौरतलब है कि शहरी सड़क से ट्रैफिक दबाव कम करने के उद्देश्य से बायपास का निर्माण कराया गया है, हांलाकि इसके बाद फोरलेन और फ्लाईओवर बनने से इसकी उपयोगिता कम हो गई। इसके बावजूद अधिकारी इस पर बेहिसाब पैसा खर्च कर कमाई का जरिया बनाने में लगे हुए है। मामला गंभीर है, इसकी जांच हुई तो ठेका कंपनी के साथ लोक निर्माण विभाग के इंजीनियर्स भी कटघरे में खड़े मिलेंगे।
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कर्णकांत श्रीवास्तव
(B.J.M.C.)
सीनियर जर्नलिस्ट, फाउंडर एंड चीफ एडिटर- सेंट्रल रिपोर्टर समाचार पत्र एवं एक्स रिपोर्टर न्यूज वेबसाइट, मीडिया प्रभारी- जिला पत्रकार महासंघ, राजनांदगांव एवं विशेष सदस्य- प्रेस क्लब राजनांदगांव।
मो. 9752886730


