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राजनांदगांव। भारत के संसद में पारित कानून 2019 की धारा 12 की (ग) और छत्तीसगढ़ राज्य के स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा जारी स्थाई आदेश दिनांक 23/11/2016 की कंडिका 1 और 5 में यह स्पष्ट लिखा हुआ है कि प्रायवेट विद्यालयों के कक्षा पहली या पूर्व शिक्षा देने वाले कक्षाओं में गरीब बच्चों के लिए 25 प्रतिशत आरक्षित होगा, यानि प्रायवेट विद्यालयों को अपने एंट्री क्लास के कुल दर्ज संख्या का 25 प्रतिशत सीट में गरीब बच्चों को प्रवेश देना अनिवार्य है।
इसके बावजूद शिक्षा का अधिकार कानून के अंतर्गत इस वर्ष 2023-24 में प्रायवेट स्कूलों में गरीब बच्चों को प्रवेश देने के लिए सीटों की गणना में मनमानी की जा रही है। छत्तीसगढ़ पैरेंट्स एसोसियेशन के प्रदेश अध्यक्ष क्रिष्टोफर पॉल इस मामले को लेकर लगातार जिला प्रशासन को दस्तावेजी साक्ष्य देकर जानकारी दे रहे है कि प्रतिवर्ष प्रत्येक प्रायवेट विद्यालयों को अपने एंट्री क्लास की प्रस्तावित सीटों की जानकारी देना अनिवार्य है और प्रत्येक प्रायवेट स्कूलों को प्रतिवर्ष अपने एंट्री क्लास में 25 प्रतिशत गरीब बच्चों को आरटीई कानून के अंतर्गत प्रवेश देना अनिवार्य है लेकिन आरटीई कानून के अंतर्गत इस वर्ष 2023-24 में सीटों की गणना बीते वर्ष 2022-23 के एंट्री क्लास की दर्ज संख्या के अनुसार किया जा रहा है, जबकि यह नियम निर्देश छत्तीसगढ़ राज्य के स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा जारी स्थाई आदेश दिनांक 23/11/2016 का उल्लघंन है।
इस गणना के अनुसार कई नामी निजी स्कूलों ने अपने स्कूलों में इस वर्ष 2023-24 में अपने एंट्री क्लास में गरीब बच्चों के लिए सिर्फ एक सीट निर्धारित किया है, जो आरटीई कानून का उल्लघंन है।
श्री पॉल का कहना है छत्तीसगढ़ राज्य के स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा जारी  आदेश दिनांक 23/11/2016 में परिवर्तन करने का अधिकार सिर्फ राज्य सरकार के पास है लेकिन कुछ अधिकारी प्रायवेट स्कूलों को अनुचित लाभ दिलाने की नियत से आरटीई नियम में गैरकानूनी ढंग से परिवर्तन कर मनमानी कर रहे है। हम कलेक्टर को दस्तावेजी साक्ष्य देकर प्रायवेट स्कूलों में ज्यादा से ज्यादा गरीब बच्चों को प्रवेश दिलाने की मांग कर रहे है लेकिन जिला शिक्षा अधिकारी अपने उच्च अधिकारीयों और कलेक्टर को मिथ्या जानकारी देकर दिगभ्रामित कर रहे है।

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