राजनांदगांव। शिक्षा का अधिकार कानून पूरे प्रदेश में 2010 से आरंभ हुआ है लेकिन इस कानून को जिले में मजाक बना कर रख दिया गया है। प्रायवेट स्कूलों के द्वारा गरीब बच्चों को निःशुल्क देने में प्रतिवर्ष अनाकानी किया जा रहा है, सीटों की वास्ताविक संख्या छिपाई जा रही है। कई प्रायवेट स्कूलों को प्रवेशित बच्चों की संख्या से कई अधिक प्रतिपूर्ति राशि दी जा रही है। ऐसे अनेको मामले में दस्तावेजी साक्ष्य के साथ लिखित शिकायते भी हो रही है लेकिन जिला शिक्षा अधिकारी और जिले के प्रशासनीक अधिकारी इस मामले मे रूचि नही ले रहे है और सूक्षमता और निष्पक्षता से जांच नही कराया जा रहा है, जिससे सीधे प्रायवेट स्कूलों को लाभ मिल रहा है क्योंकि प्रतिवर्ष कम सीटों में प्रायवेट स्कूलों के द्वारा गरीब बच्चों को प्रवेश दिया जा रहा है।
इस शिक्षा सत्र 2023-24 में जिले में 292 प्रायवेट स्कूलों ने आरटीई पोर्टल में पंजीयन कराया है और सोमवार से ऑनलाईन आवेदन करने के लिए पोर्टल खोला गया है लेकिन जब बच्चों ने ऑनलाईन आवेदन भरने का प्रयास किया तो पाया कि, लगभग 86 प्रायवेट स्कूलों का नाम ही आरटीई पोर्टल से गायब है क्योकि इन 86 नामी बड़े प्रायवेट स्कूलों ने इस सत्र में पोर्टल में आरटीई सीट्स शून्य बताया है, तो वंही कई नामी प्रायवेट स्कूलों ने अपने स्कूलों में आरटीई की संख्या एक बताया है, जबकि आरटीई सीटों की संख्या को जिला शिक्षा अधिकारी ने सत्यापित किया है, उसके पश्चात् की आरटीई सीटों की वास्ताविक संख्या पोर्टल में अब दिखाई दे रहा है।
छत्तीसगढ़ पैरेंट्स एसोसियेशन ने इस मामले की जानकारी राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग, संचालक, डीपीआई, संभागिय आयुक्त, संभागिय संयुक्त संचालक और कलेक्टर को देकर दोषीयों पर तत्काल कार्यवाही की मांग की गई है। एसोसियेशन के प्रदेश अध्यक्ष क्रिष्टोफर पॉल ने डीईओ और डिलिंग क्लर्क को इस मामले में पूर्ण उत्तरदायी बता रहे है क्योंकि उनका कहना है कि डीईओ और डिलिंग की मिलीभगत से यह घोटाला हुआ है, गरीब बच्चों के मौलिक अधिकार का हनन है, उन्हे निःशुल्क शिक्षा पाने से वंचित करना गंभीर प्रवृति का अपराध है, और यह संगठित अपराध है।
जानकार बता रहे है डीपीआई ने इस मामले को बहुत ही गंभीरता से लिया है और गुरूवार को प्रमाणित जानकारी के साथ डीईओ ओर डिलिंग क्लर्क को डीपीआई में तलब किया था और डीईओ और डिलिंग क्लर्क पर निलंबित की कार्यवाही होना तय माना जा रहा है।


