एक्स रिपोर्टर न्यूज। राजनांदगांव
ग्राउंड वाटर शार्टेज के बीच नेता जी (कांग्रेस) द्वारा पानी चूसने वाले गन्ना फसल को प्रोत्साहित करने की घोषणा ने राजनांदगांव समेत नवगठित जिले में माहौल गरमा दिया है। जानकारों में चर्चा आम हो चुकी है, आखिर धान का विकल्प गन्ना कैसे? क्योंकि दोनों सर्वाधिक पानी लेने वाली फसल है। जबकि धान के बदले कम पानी लेने वाले दलहन और तिलहन फसल को बढ़ावा दिया जाना चाहिए। खैर बात निकली है तो दूर तलक जाएगी। भूजल को लेकर जिले की स्थिति चिंताजनक है। यहां तेजी से भूजल सिमट रहा है। हर साल लगभग 50 सेंटीमीटर पानी नीचे खिसक रहा है। ये हम नहीं केंद्रीय भूमीजल बोर्ड (CGWB, जल शक्ति मंत्रालय, भारत सरकार) की रिपोर्ट कह रही है।
साल 2017, 2020 और 2022 अक्टूबर में जारी किए गए सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक लगातार तीन बार डोंगरगांव ब्लॉक को सेमी क्रिटिकल जोन में रखा गया है। वर्ष 2017 में डोंगरगांव और राजनांदगांव सेमी क्रिटिकल जोन में थे। साल 2020 में ब्लॉक की संख्या चार हो गई। इस वर्ष छुईखदान, डोंगरगांव और डोंगरगढ़ को सेमी क्रिटिकल जोन घोषित किया गया। जबकि खैरागढ़ को भूजल शार्टेज की वजह से क्रिटिकल जोन में डाल दिया गया। 2022 अक्टूबर में जारी सर्वे रिपोर्ट में एक बार फिर डोंगरगांव, डोंगरगढ़, खैरागढ़ और राजनांदगांव को सेमी क्रिटिकल जोन घोषित किया गया। सीधे कहे तो इन इलाकों में ट्यूबवेल से सिंचाई करना खतरनाक है। यदि भविष्य में गन्ना की खेती की गई तो अकाल की स्थिति निर्मित हो सकती है। जिन इलाकों में नहर नाली का विस्तारीकरण नहीं हुआ है वहां तो धान की बोनी भी नहीं की जानी चाहिए।
ऐसे समझे भूजल सर्वे की कैटेगिरी
जहां भूजल का 100 फीसदी या इससे ज्यादा इस्तेमाल होता है, उस विकासखंड को अतिदोहन की श्रेणी में रखा जाता है। जबकि 90 से 100 फीसदी तक भूजल पर निर्भर रहने वाले ब्लॉकों को क्रिटिकल यानी संकटपूर्ण माना जाता है। 70 से 90 फीसदी तक इस्तेमाल करने वाले सेमी क्रिटिकल और 70 फीसदी से कम भूजल स्त्रोत का दोहन करने वाले ब्लॉक को सुरक्षित श्रेणी में रखा जाता है।
सरकार ने खुद माना पर क्रियान्वयन फिसड्डी
गिरते भूजल को लेकर केंद्र और राज्य सरकार की ओर से कई बैठक व निर्णय लिए जाते रहे है। लेकिन ग्राउंड लेवल पर इसका क्रियान्वयन अभी तक नहीं किया जा सका है। सरकार ने खुद माना है कि भूजल को सुरक्षित रखने के लिए उद्योगों में भी पानी के प्रबंधन पर फोकस, सिंचाई के नए तरीके, जल प्रबंधन में महिलाओं की भागीदारी, कम पानी की खपत वाली फसलों को प्रोत्साहन, वनीकरण, रेन वाटर हार्वेस्टिंग, वाटर शेड्स तालाबों का निर्माण, डबरी का निर्माण, बहुत गहरे में जा चुके स्त्रोत से कम निकासी, करना ही उचित प्रबंध है।
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कर्णकांत श्रीवास्तव
(B.J.M.C.)
सीनियर जर्नलिस्ट, फाउंडर एंड चीफ एडिटर-एक्स रिपोर्टर न्यूज वेबसाइट, ब्यूरोचीफ-दैनिक सत्यदूत संदेश, मीडिया प्रभारी- जिला पत्रकार महासंघ, राजनांदगांव, विशेष सदस्य-प्रेस क्लब राजनांदगांव।
मो. 9752886730


