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राजनांदगांव। शासकीय दिग्विजय महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. के. एल.टांडेकर के मार्गदर्शन में राजा दिग्विजय दास की पुण्यतिथि के अवसर पर समस्त महाविद्यालय परिवार ने उन्हें श्रद्धा सुमन अर्पित किया। दानवीर राजा के शिक्षा के प्रति जागरूकता ने न केवल राजनांदगांव शहर के लोगों को बल्कि संपूर्ण जिले के तमाम युवाओं को उच्च शिक्षा प्राप्त करने का अवसर स्थान प्रदान किया है। तत्कालीन जनप्रतिनिधियों के अथक प्रयास एवं राजा दिग्विजय दास के सहयोग से महाविद्यालय की नींव रखी गई।

75 विद्यार्थियों के साथ बी. ए. एवं बी.कॉम संकाय से प्रारंभ इस महाविद्यालय में वर्तमान में 6500 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं।
राजा जी के इस योगदान को स्मरण करते हुए प्राचार्य डॉ. के. एल. टांडेकर ने कहा कि ऐसे मनीषियों से ही देश आबाद है। शिक्षा के प्रति समर्पण की भावना उनकी ऐसी थी कि उन्होंने अपने राजमहल को शिक्षा के लिए दान कर दिया। मैं उनको शत-शत नमन करता हूं।

उनका यह अमूल्य योगदान हम सबको अपने कर्तव्यों के लिए प्रेरित करने वाला है। आज यह महाविद्यालय उच्च शिक्षा के क्षेत्र में मील का पत्थर साबित हो रहा है, साथ ही क्रीड़ा एवं सांस्कृतिक उपलब्धियों में भी अग्रणी है। हम के द्वारा स्थापित महाविद्यालय को उच्च शिखर पर जाने का संकल्प लें यही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

इतिहास विभाग के प्राध्यापक डॉ. शैलेंद्र सिंह ने राजा दिग्विजय दास की जीवनी पर प्रकाश डालते हुए उनके योगदान को स्मरण किया। इस अवसर पर राजनांदगांव की प्रथम नागरिक महापौर हेमा देशमुख, पूर्व सांसद एवं महापौर मधुसूदन यादव, विभिन्न वार्डों के पार्षद गण, नगर के गणमान्य नागरिक, वैष्णव समाज राजनांदगांव, जीवन संस्था समिति के अधिकारी एवं सदस्यगण तथा समस्त महाविद्यालय परिवार उपस्थित था।

By Amitesh Sonkar

Sub editor

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