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राजनांदगांव। उच्चतम न्यायालय और केंद्र सरकार ने स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा को लेकर कई कड़े निर्देश जारी किए है, जिसे स्कूल सेफ्टी रूल भी कहा जाता है, जिसका आज पर्यन्त कड़ाई से पालन नहीं हो पाया, वरना आज स्कूलों में बच्चे पहले से अधिक सुरक्षित होते।
जिले के किसी भी स्कूल का फायर ऑडिट नहीं हुआ होगा, क्योंकि जिम्मेदार अधिकारियों को हमेशा किसी बड़ी घटना का इंतजार होता है और जो शायद अभी तक हुआ नहीं क्योंकि जो घटना म्युनिस्पल स्कूल में संचालित उर्दू स्कूल में हुआ या जो घटना अजीज पब्लिक स्कूल, इंदामारा में हुआ वह इतना बड़ा नहीं है कि स्कूलों में सेफ्टी की जांच कराया जा सके या स्कूल में बच्चों की सिक्योरिटी की जांच कराया जा सके। कानून में प्रावधान है कि बच्चों को स्कूल में मारना-पीटना सख्त प्रतिबंधित है, लेकिन ऐसा हो नहीं रहा है, क्योंकि जब ऐसी घटना स्कूल में होती है तो जिम्मेदार अधिकारी कोई कार्यवाही नहीं करते, क्योंकि स्कूल प्रशासन या तो बड़े अप्रोच वाला होता है या फिर बच्चा किसी गरीब परिवार से होता है।
छत्तीसगढ़ पैरेंट्स एसोसियेशन के प्रदेश अध्यक्ष क्रिष्टोफर पॉल ने कलेक्टर और डीईओ को पत्र लिखकर उर्दू स्कूल के प्रधान पाठक और अजीज पब्लिक स्कूल के प्राचार्य के खिलाफ जांच कर प्रथम सूचना पत्र पंजीबद्ध कराने की मांग की गई है, क्योंकि उर्दू स्कूल में जो बच्चा जला है और अजीज स्कूल में जिस बच्चे को आंख में मारा गया है, वह हैवानियत है।
श्री पॉल का कहना है कि बच्चे स्कूल में सुरक्षित नहीं है, जब बच्चा स्कूल में होता है तो स्कूल का बच्चे पर नियंत्रण होता है। स्कूल जान-बुझकर बच्चे की उपेक्षा करता है तो वह गैर जरूरी मानसिक या शारीरिक पीड़ा का कारण बन सकता है। इसे किशोर न्याय अधिनियम 2015 के उल्लंघन के रूप में माना जा सकता है।

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