राजनांदगांव। विधायको द्वारा पूछे गए सवालों का छत्तीसगढ़ विधान सभा में मिथ्या जानकारी भेजने से आदित्य खरे की मुसीबत और बढ़ गई है। डॉ. रेणु अजीत जोगी ने विधान सभा मानसून सत्र और शीतकालीन सत्र 2021 में कोरोना काल में बंद हुए प्रायवेट स्कूलों और उसमें अध्ययनरत् बच्चों के संबंध में सवाल पूछा था जिसका मिथ्या जवाब श्री आदित्य खरे द्वारा सदन में भेजा गया था,
कि कोरोना काल में बंद हुए प्रायवेट स्कूलों में अध्ययनरत् सभी बच्चों को अन्य स्कूलों में प्रवेश दिलाया जा चूका है और जिले में अब कोई भी बच्चा शिक्षा व स्कूल सेे वंचित नही है, कोई भी बच्चा शालात्यागी नही है, जबकि पीड़ित पालको ने लिखित शिकायत कर बताया कि उनके बच्चे जिस स्कूल में प्रवेशत थे वह स्कूल कोरोना काल में बंद हो गया लेकिन उनके बच्चों को आरटीई नोडल अधिकारी आदित्य खरे ने कभी किसी अन्य स्कूल में प्रवेश नही दिलाया, उनके बच्चों का दो वर्ष बर्बाद कर दिया गया, और आज वे मजबूरी में पैसे उधारी लेकर, सोना गिरवी रखकर अपने बच्चों को प्रायवेट स्कूलों में पढ़ा रहे है जिसके लिए आदित्य खरे पूर्णतः दोषी है।
पीड़ित पालको के द्वारा इस मामले की लिखित शिकायत जिला प्रशासन के जिम्मेदार अधिकारीयों से भी की गई थी लेकिन इस गंभीर मामले में ना तो आत पर्यन्त जांच हुई और ना दोषी आरटीई नोडल अधिकारी के विरूद्ध कोई कार्यवाही हुई, बल्कि उन्हे डीईओ की अनुपस्थिति में हर बार डीईओ प्रभार दे दिया जाता है, जिसको लेकर पीड़ितो ने आपत्ति दर्ज की है। छत्तीसगढ़ पैरेंट्स एसोसियेशन का एक प्रतिनिधि मंडल सोमवार को रायपुर में डॉ. रेणु जोगी से मिलकर सदन में मिथ्या जानकारी प्रस्तुत करने वालों पर सख्त कार्यवाही कराने की मांग की गई है। संयुक्त संचालक दुर्ग संभाग ने भी पैरेंट्स एसोसियेशन की मांग पर कोरोना काल में बंद हुए प्रायवेट स्कूलों को उसमें प्रवेशत आरटीई के बच्चों की जांच करने जिला शिक्षा अधिकारी राजनांदगांव को निर्देशित किया है। जानकार बता रहे है कि विधान सभा में मिथ्या जानकारी देना गंभीर प्रवृति का अपराध है और यदि संबंधित अधिकारी दोषी पाए जाते है तो उनके विरूद्ध सख्त कार्यवाही हो सकती है क्योंकि सदन में जानकारी शिक्षा मंत्री के माध्यम से प्रस्तुत किया जाता है, जिससे मंत्री और सरकार की छवि धुमिल होती है, ऐसे मामलो को सरकार गंभीरता से लेती है।


