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गांधी मैदान में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन भक्त प्रहलाद की गाथा सुनाई गई

कवर्धा। दिव्य ज्योति जागृति संस्थान के संस्थापक एवं संचालक गुरुदेव श्री आशुतोष महाराज जी कि शिष्या कथा व्यारा ” सुश्री मेरूदेवा भारती ” ने आज श्रीमद्भागवत कथा के तृतीय दिवस में भक्त प्रहलाद कि गाथा को समस्त श्रद्धालुगणों के समक्ष रखते हुऐ कहा कि प्रहलाद के पिता हिरण्यकश्यप ने उस पर कितने अत्याचार किए , कभी पर्वत से गिराया , तो कभी सागर में उसे छोड़ दिया गया । परन्तु हर बार प्रहलाद कि रक्षा हुई । क्योंकि प्रहलाद के पास ईश्वर का वह सच्चा नाम था , जिसके सिमरण से इन विपरित परिस्थितियों में भी उसकी रक्षा हो पाई । परन्तु आज सारा समाज अशांत है ! दुखी है ! आज वह बाहर से सुरक्षित होने के लिए बहुत कुछ कर रहा है । परन्तु वह सुरक्षित नहीं हो पा रहा । क्योंकि आज रक्षक स्वयं भक्षक बन गये हैं । इसलिए सन्तो ने कहा , आज समाज के प्रत्येक व्यक्ति को आवश्यकता है । सच्चे सुरक्षा कवय कि , जो उसकी हर परिस्थिति में रक्षा कर सकें । और सन्तो ने कहा , कि वह सुरक्षा कवच मात्र ईश्वर का ही नाम है । जो हर पल एक जीवात्मा कि रक्षा करता है । परन्तु आज सारा संसार ईश्वर के गुणवाचक नाम को ही जपता है । जो जिह्वा से लिया जाता है । गुणवाचक नाम का अर्थ है , जो नाम ईश्वर के गुणों के कारण भक्तों ने रखे । जैसे माखन चुराया तो माखनचोर कुछ और होता है । जिस नाम के द्वारा रक्षा हो पाती है ।

तभी कहा राम – राम सब कोई कहे ठग , ठकुर और चोर जिस नाम से मुक्ति मिले वो नाम कुछ और , और आगे रााध्वी जी ने कहा , इसलिए प्रभु का शाश्वत नाग तो जिह्वा रो परे होता है । ना वह बोला जाता है , ना वह जपा जाता है , और ना ही लिखा जाता है । उस आदि नाम को तो मात्र एक पूर्ण ब्रहमनिष्ठ गुरू ही एक जीवात्मा के भीतर प्रकट करते है और इसी आदि नाम को द्रोपदी ने भी ” जगद गुरू भगवान श्रीकृष्ण जी से प्राप्त किया था । तभी भरी सभा में उसकी रक्षा हो पाई थी ।

इसलिए हमारे ग्रन्थों में भी कहा , ” कलयुग केवल नाम आधारा सुमिर- सुमिर नर उत्तराहि पारा ” इसलिए आज रामाज को भी इसी शाश्वत् नाम कि आवश्यकता है । जो इरा कलि के भीतर भी उसकी रक्षा कर सके । परन्तु इसके लिए गुरु कि शरण में जाने कि आवश्यकता है । वही प्रभु नाम का सच्चा सुरक्षा कवच प्रदान करने का सामर्थ्य रखते है । “

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