राजनांदगांव। शहर ही नहीं अब गावों में शराब का अवैध कारोबार तेजी से फलफूल रहा है। कोचिए स्टॉक डिलीवरी के लिए तस्कर बन गए है। शराब के अवैध विक्रय और परिवहन मामले में बढ़ोत्तरी अभी तक आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिन्ह लगाता आया है, लेकिन अब पुलिस की कार्यशैली पर भी सवाल खड़े होने लगे है। सूत्रों के मुताबिक पुलिस जवानों की मदद से शासकीय शराब दुकानों से शराब की खेप ग्रामीण अंचल तक पहुंचाई जा रही है। शहर के ही कुछ कोचिए घुमका और सोमनी थाना क्षेत्र के ग्रामीण क्षेत्र में शराब पहुंचा रहे हैं। पिछले दिनों ऐसा ही एक मामला सोमनी थानाक्षेत्र की घुमका से लगी सरहद में सामने आया।
शराब का अवैध धंधा अब सिर्फ कोचियों और तस्करों तक ही सीमित नहीं रह गया है। बल्कि पुलिस अमले के कुछ आरक्षक और जवान भी इसमें शामिल हो गए हैं। सरहदों से लगे थानाक्षेत्र के ये प्रहरी आसानी से तस्करों की आवाजाही को नियंत्रित कर रहे हैं। कुछ दिनों पहले नांदगांव से शराब तस्करी कर रहे तस्कर को पुलिस जवान ने धर दबोचा। लेकिन इस मामले का थाना पहुंचने से पहले ही निपटारा कर दिया गया। खबर है कि, जवान ने मामले को दबाने के एवज में तस्कर से हजारों रुपए लिए और उसे जाने दिया। दरअसल, यह तस्कर लंबे समय से इस इलाके में शराब की खेप कोचियों तक पहुंचा रहा है।
पुलिस के आला अफसरों तक पहुंची मामले की जानकारी
इस मामले की जानकारी पुलिस के आला अफसरों तक भी पहुंची है। सोमनी और घुमका थानाक्षेत्र के पुलिसवालों की सांठगांठ को लेकर खुलासे हो रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्र में चर्चा आम है कि पुलिस के ही संरक्षण में शराब का गोरखधंधा चल रहा है। कुछ मामलों में राजनीतिक हस्तक्षेप की बात भी सामने आती है।
आरक्षक-जवानों का गुट भी सक्रिय
कोचियों पर लगाम नहीं कस पा रही है। शासकीय दुकानों से निकल रही बड़ी खेप अलग-अलग हिस्सों में पहुंचाई जा रही है। पुलिस की पेट्रोलिंग टीम की नज़र के सामने तस्करी को अंजाम दिया जा रहा है। अलग-अलग थानों के आरक्षक-जवानों का एक गुट भी इसमें सक्रिय है। यह तस्करों को आराम से ठिकाने तक पहुंचने और खेप पहुंचाने में मदद करता है। इस एवज में तस्कर की ओर से बड़ी रकम उन तक पहुंचाई जाती है।
अधिकारियों को खबर नहीं
दोपहिया और चार पहिया वाहनों से ग्रामीण क्षेत्र में धड़ल्ले से शराब की तस्करी हो रही है। एक ओर जहां कुछ आरक्षक और जवानों का गुट भी इसमें सक्रिय है तो दूसरी ओर अफसरों को इसकी खबर ही नहीं है। यह पूरा मामला एक-दो आरक्षक ही संभाल रहे हैं। उन्होंने ही अपने आसपास के थानों के दूसरे जवानों को भी इसमें शामिल कर लिया है। तस्करों और कोचियों से मिल रही अच्छी-खासी रकम ये आपस में बांट लेते हैं। हर एक दो दिनों की आड़ में शराब की तस्करी की जा रही है।
कई थानों में दर्ज है मामले
बताया जा रहा है कि राजनांदगांव का एक युवा इस पूरे कारोबार का सरगना बना बैठा है। वह कभी खुद तो कभी अपने लोगों से शराब की तस्करी करवा रहा है। खबर यह भी है कि वह खुद शहर में भी खुलेआम शराब की बिक्री कर रहा है। इसके और इसके लोगों के खिलाफ शहर के कोतवाली, चिखली सहित लालबाग थाना में शराब तस्करी के मामले दर्ज होने की भी जानकारी है। बावजूद उसे बेलगाम छोड़ दिया गया है। होटल की आड़ में शराब की बेचने वाला युवक ग्रामीण क्षेत्र में शराब का बड़ा कारेाबार फैला रहा है।
आबकारी को फर्क नहीं पड़ता
अवैध शराब बिक्री – तस्करी के रोजाना सामने आने वाले मामलों के बावजूद आबकारी विभाग को इससे फर्क नहीं पड़ता। महिने में किसी एक कार्रवाई के बाद अपनी पीठ थपथपाने वाला यह विभाग अपनी जिम्मेदारियों से कोसो दूर है। शासकीय दुकानों से होने वाली तस्करी को लेकर भी विभाग ने कभी कड़ा रुख नहीं अपनाया है। लंबे समय से आबकारी विभाग की कार्यशैली को शराब के अवैध धंधे को बढ़ावा देने वाली ही बनी हुई है और सवालों के घेरे में है।
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कर्णकांत श्रीवास्तव
(B.J.M.C.)
सीनियर जर्नलिस्ट, फाउंडर एंड चीफ एडिटर, एक्स रिपोर्टर न्यूज वेबसाइट, मीडिया प्रभारी, जिला पत्रकार महासंघ, राजनांदगांव, विशेष सदस्य, प्रेस क्लब राजनांदगांव।
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