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भिलाई। श्री शंकराचार्य प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी भिलाई द्वारा महामहिम राज्यपाल एवं कुलाध्यक्ष द्वारा निर्देशित पर्यावरण एवं जलवायु पर जागरूकता एवं संरक्षण कार्यक्रम के तहत वृक्षारोपण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रो. डॉ. एल.एस. निगम, कुलपति श्री शंकराचार्य प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी, भिलाई एवं विशिष्ट अतिथि के रूप में श्री. पी. के. मिश्रा, कुलसचिव की गरिमामयी उपस्थिति रहीं। प्रो. निगम एवं पी. के. मिश्रा के नेतृत्त्व में यूनिवर्सिटी परिवार द्वारा यूनिवर्सिटी के प्रांगण में विभिन्न फलदार एवं औषधीय पेड़ पौधों का रोपण किया गया. तत्पश्चात कार्यक्रम के मुख्य अतिथि कुलपति प्रो. निगम ने यूनिवर्सिटी परिवार को संबोधित करते हुए वृक्षारोपण कार्यक्रम के महत्त्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि पेड़ और अन्य वनस्पतियाँ प्रकाश संश्लेषण के माध्यम से पर्यावरण से कार्बन डाइऑक्साइड को कम करने में सहायता करती हैं साथ ही मृदा भी पशुओं और पौधों से मिलने वाले जैविक कार्बन को अवशोषित करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती है। हालाँकि मृदा में अवशोषित इस प्रकार के कार्बन की मात्रा भूमि प्रबंधन प्रथाओं, खेती के तरीकों, मिट्टी के पोषण और तापमान के साथ बदलती रहती है। जलवायु परिवर्तन जैसी गंभीर चुनौती से निपटने के अलावा वन हमारे दैनिक जीवन में कई तरह से महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

उन्होंने बताया कि जलवायु परिवर्तन, सूखा एवं बाढ़ की घटनाओं में वृद्धि, भूस्खलन आदि के कारण उपजाऊ भूमि का तीव्र क्षरण हो रहा है।, भोजन, चारा, ईंधन और कच्चे माल की बढ़ती मांग से भूमि पर दबाव तथा प्राकृतिक संसाधनों के लिये प्रतिस्पर्द्धा में वृद्धि हुई है। विश्व की कुल मानव आबादी का लगभग 18% और पशुओं की आबादी का 15% हिस्सा भारत में पाया जाता है जबकि विश्व के कुल भू-भाग का मात्र 2.4% हिस्सा ही भारत के अंतर्गत है, ऐसे में देश में नागरिकों की ज़रूरतों को पूरा करने के लिये प्राकृतिक संसाधनों पर दबाव बढ़ता जा रहा है। आंध्रप्रदेश में वर्षा की कमी के कारण किसानों की बोरवेल पर निर्भरता बढ़ती जा रही है जिससे मिट्टी की शुष्कता में भी वृद्धि देखी गई है।झारखंड राज्य में अनियंत्रित खनन के कारण मृदा अपरदन और जल संकट में काफी वृद्धि हुई है, केंद्रीय भू-जल बोर्ड के आँकड़ों के अनुसार, राज्य के गिरिडीह ज़िले के एक ब्लॉक में जलस्तर वर्ष 8 मीटर से गिरकर 10 मीटर तक पहुँच गया।वहीं गोवा राज्य में खनन और बढ़ते शहरीकरण तथा गुजरात में चारागाह एवं कृषि के लिये भू-अतिक्रमण के नकारात्मक प्रभाव देखने को मिले हैं।

कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि पी.के. मिश्रा कुलसचिव ने बताया कि हाल ही में महामहिम राज्यपाल सुश्री अनुसुईया उइके के निर्देश पर राज्य के सभी शासकीय व निजी विश्वविद्यालयों में पर्यावरण एवं जलवायु पर जागरूकता एवं संरक्षण हेतु टास्क फोर्स के गठन के लिये राजभवन सचिवालय द्वारा सभी विश्वविद्यालयों को पत्र भेजा गया है। जिसमें उल्लेखनीय है कि नई दिल्ली में नवंबर 2021 में राष्ट्रपति भवन में संपन्न गवर्नर कॉन्फ्रेंस में प्राप्त निर्देशों के तारतम्य में राजभवन सचिवालय द्वारा समस्त विश्वविद्यालयों को यह पत्र निर्गत किया गया है। जिसके तहत गौरतलब है कि राज्य के समस्त विश्वविद्यालयों एवं उनसे संबद्ध महाविद्यालय परिसर को हरा-भरा एवं स्वच्छ रखने तथा विद्यार्थियों में पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता लाने के उद्देश्य से स्वच्छता एवं वृक्षारोपण कार्यक्रम का आयोजन किया जाना है। उक्त कार्यक्रम का संयोजन कार्यक्रम डॉ. प्राची निमजे, अधिष्ठाता छात्र कल्याण एवं सह-संयोजन श्री चंद्रशेखर नागेन्द्र द्वारा किया गया। कार्यक्रम में प्रो. (डॉ.) शिल्पी देवांगन, प्रो.(डॉ.) संदीप श्रीवास्तव. श्री. विनय पीताम्बरन, डॉ. नेहा सोनी, डॉ. राजश्री नायडू, डॉ. राहुल मिश्रा, डॉ. नरेश कुमार साहू , डॉ. प्रतिमा बारीक, डॉ. संजू सिंह, डॉ. सचिन दास, डॉ. निहारिका देवांगन, डॉ. सैफाली माथुर, डॉ. विजेता दीवान, डॉ. सुमिता सेनगुप्ता, डॉ. रविन्द्र कुमार यादव, डॉ. ललित कुमार, श्री मनीष साहू, सुश्री निकिता चंद्राकर, श्री अमित कर्माकर, श्रीमती आरती मिश्रा, श्रीमती लेखा बघेल एवं विद्यार्थियों, अधिकारीयों-कर्मचारियों की गरिमामई उपस्थिति रहीं।

By Amitesh Sonkar

Sub editor

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