दिग्विजय महाविद्यालय मे “जनजाति समाज” विषय पर अंतर्विषयक अतिथि व्याख्यान का आयोजन
राजनांदगांव। शासकीय दिग्विजय स्वशासी स्नातकोत्तर महाविद्यालय राजनांदगांव के प्राचार्य डॉ. के.एल. टांडेकर के मार्गदर्शन मे समाजशास्त्र विभाग द्वारा विभागाध्यक्ष ए.के. मंडावी और सहा. प्राध्यापक ललिता साहू के निर्देशन में समाजशास्त्र विभाग मे वर्चुअल रूप से “जनजाति समाज” विषय पर अतिथि व्याख्यान का आयोजन किया गया, जिसमें विषय विशेषज्ञ व मुख्य वक्ता के रूप मे डॉ अंजलि ध्रुव सहायक प्राध्यापक ,ानव शास्त्र विभाग शा. दिग्विजय महाविद्यालय राजनांदगांव के द्वारा समाजशास्त्र के विद्यार्थियो को जनजाति समाज के बारे मे विस्तार पूर्वक व्याख्यान दिया गया।
डॉ अंजलि धुव्र ने अपने इस व्याख्यान मे बताये की भारत के विस्तृत क्षेत्रफल और भौगोलिक विभिन्नताओं के कारण सभी जनजातियों का जीवन समान प्रकृति का नहीं है। उनमें भौगोलिक पृथकता के अतिरिक्त संस्कृति, भाषा और अर्थव्यवस्था के आधार पर भी महत्वपूर्ण भिन्नता देखने को मिलती है। भारत में पाए जाने वाले प्रमुख जनजाति भौगोलिक वर्गीकरण को विस्तार पूर्वक समझाते हुए कहा कि भारत में ज्यादातर जनजाति आज भी वनाच्छादित क्षेत्रों जैसे पहाड़ों जंगलों मरुस्थल में निवासरत हैं स भारत में जनसंख्या के आधार पर सर्वाधिक जनजातियां की संख्या मध्यप्रदेश में है स संख्या और आकार की दृष्टि से देखें तो जनजाति की सर्वाधिक बड़ी समूह गोंड, भील, संथाल, मुंडा, उराँव, आदि है जिनमें प्रत्येक की जनसंख्या कम से कम 10 लाख है स जनजातियों की सबसे छोटी समूह 50 से 100 व्यक्तियों के समूह में भी हैं जो कि अंडमान निकोबार दीप समूह मे स्थित हैं स इसके अलावा, लिंबू, लेपचा, आका, रामा, कचारी, गौरो, खासी, नागा खडि़या, गदब, बांदा ,चेचू, टोडा, कादर, कणीदर, कुरोवन आदि भारत मे स्थित जन जातियां है। डॉ. अंजली ध्रुव ने अपने व्याख्यान में भारतीय जनजाति समाज के पारिवारिक संरचना , आर्थिक सामाजिक व राजनीतिक संरचना को विस्तार से बताएं तथा जनजाति की प्रमुख विशेषताओं, आय के साधन, रीति रिवाज व सामाजिक धार्मिक मान्यताओं के बारे में भी बताया स उन्होंने यह भी कहा कि जनजाति समाज अपनी विशिष्टता के कारण पहचानी जाती है। अतिथि व्याख्यान के पश्चात समाजशास्त्र के विद्यार्थियों ने भारतीय जनजाति समाज से संबंधित अपनी शंकाओ और जिज्ञासा को पूछा स विद्यार्थियों के शंकाओ और जिज्ञासा को डॉ. अंजली ध्रुव द्वारा स्पष्ट किया गया। इस अतिथि व्याख्यान का संचालन कर रहे सहा. प्राध्यापक ललिता साहू ने इस अतिथि व्याख्यान के लिए प्राचार्य डॉ .के. एल. टांडेकर सर एवं डॉ. अंजली ध्रुव को बहुत-बहुत धन्यवाद व आभार व्यक्त किया। इस अतिथि व्याख्यान में डॉ. ए.के मंडावी, सुनील मिश्रा, शोभित साहू व समाजशास्त्र के विद्यार्थी भी उपस्थित थे।

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