IMG-20241026-WA0010
IMG-20241026-WA0010
previous arrow
next arrow

एक्स रिपोर्टर न्यूज़ । राजनांदगांव

छत्तीसगढ़ की संस्कारधानी कहे जाने वाले राजनांदगांव जिले में इन दिनों सत्ता पक्ष से जुड़े एक प्रभावशाली ‘नेपो किड’ (रूलिंग पार्टी के नेता का पुत्र) की कार्यप्रणाली चर्चा और विवादों का केंद्र बनी हुई है। स्थानीय स्तर पर यह आरोप तेजी से पैर पसार रहे हैं कि शासन-प्रशासन के कार्यों में इस युवा नेता का अत्यधिक हस्तक्षेप न केवल लोकतांत्रिक मर्यादाओं को लांघ रहा है, बल्कि जिले में भ्रष्टाचार के एक नए नेटवर्क को भी जन्म दे रहा है।

अघोषित सत्ता का केंद्र

सूत्रों और स्थानीय निवासियों के अनुसार, सरकारी विभागों के महत्वपूर्ण निर्णयों, तबादलों और बड़े ठेकों में इस ‘नेपो किड’ की सहमति अनिवार्य होती जा रही है। आरोप है कि बिना किसी संवैधानिक पद पर रहे, यह युवा नेता प्रशासनिक बैठकों के समांतर अपनी ‘निजी सभाएं’ कर रहा है, जहाँ फाइलों का निपटारा विकास की गति देखकर नहीं, बल्कि ‘निजी लाभ’ और ‘कमीशन’ के आधार पर किया जा रहा है।

ठेका प्रथा और कमीशनखोरी का बोलबाला

राजनांदगांव में चल रहे निर्माण कार्यों एवं अन्य प्रोजेक्ट्स में चहेते ठेकेदारों को उपकृत करने की खबरें आम हैं। चर्चा है कि टेंडर प्रक्रिया महज एक औपचारिकता बनकर रह गई है। पर्दे के पीछे से सारा नियंत्रण इसी प्रभावशाली पुत्र के हाथ में है। छोटे ठेकेदारों का कहना है कि “बिना ऊपर चढ़ावा दिए” अब काम मिलना नामुमकिन हो गया है। सभी तरह के प्रोजेक्ट्स में गुणवत्ता से समझौता कर कमीशनखोरी को बढ़ावा दिया जा रहा है।

युवाओं और कार्यकर्ताओं में असंतोष

नेपोटिज्म (भाई-भतीजावाद) का यह असर केवल भ्रष्टाचार तक सीमित नहीं है। सत्ता पक्ष के ही पुराने और कर्मठ कार्यकर्ता खुद को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं। पार्टी के अंदरूनी गलियारों में दबी जुबान से यह बात कही जा रही है कि दशकों की मेहनत करने वाले नेताओं को दरकिनार कर, केवल ‘पुत्र मोह’ के कारण नवागंतुक को कमान सौंप दी गई है। इससे न केवल कैडर में निराशा है, बल्कि भ्रष्टाचार के बढ़ते मामलों ने सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति पर भी सवालिया निशान लगा दिया है।

विभिन्न विपक्षी दलों का हमलावर रुख

विभिन्न विपक्षी दल इन आरोपों को गंभीरता से ले रहें हैं। विपक्ष का कहना है कि राजनांदगांव अब विकास का मॉडल नहीं, बल्कि ‘नेपो करप्शन’ का केंद्र बन चुका है। सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग कर अवैध उगाही की जा रही है और बड़े अफसर से लेकर निचले स्तर के अधिकारियों पर इस युवा नेता का दबाव रहता है। यही वजह तमाम शिकायतों के बावजूद गंभीर मामलों में कार्रवाई नहीं हो रही है, जिससे जनता में आक्रोष पनप रहा है।

जनता की उम्मीदें और जमीनी हकीकत

राजनांदगांव की जनता, जिसने बड़े विश्वास के साथ सत्ता परिवर्तन कर जिस नेतृत्व को चुना था, अब खुद को ठगा हुआ महसूस कर रही है। अधूरे पड़े प्रोजेक्ट्स इस बात की गवाही दे रहे हैं कि बजट का एक बड़ा हिस्सा विकास के बजाय बिचौलियों और ‘नेपो किड’ के सिंडिकेट की भेंट चढ़ रहा है।
यदि समय रहते इस अघोषित सत्ता केंद्र पर अंकुश नहीं लगाया गया, तो आने वाले समय में यह मुद्दा सत्तारूढ़ दल के लिए बड़ी मुसीबत बन सकता है। भ्रष्टाचार का यह दीमक न केवल शासन की छवि खराब कर रहा है, बल्कि राजनांदगांव के भविष्य के साथ भी खिलवाड़ कर रहा है।

*******

You missed

error: Content is protected !!