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सिंगारपुर में चेकडेम निर्माण में भारी गड़बड़ी, चेकडेम में ही बनाया सूचना पटल, प्रशासनिक तंत्र मौन

कवर्धा XReporter News। जिले के जनपद पंचायत स.लोहारा अंतर्गत ग्राम पंचायत सिंगारपुर में आजुराम पटेल के खेत के पास नाले में बनाए गए चेकडेम निर्माण कार्य में भारी अनियमितता और मनमानी के आरोप सामने आए हैं। ग्रामीणों ने निर्माण कार्य में मनरेगा नियमों की अनदेखी, ठेकेदारी प्रथा, मशीनों के उपयोग तथा सूचना पटल में भी गड़बड़ी का आरोप लगाया है।

ग्रामीणों के अनुसार चेकडेम निर्माण कार्य के लिए ग्राम पंचायत को एजेंसी बनाया गया था, लेकिन इसके बावजूद पूरा कार्य ठेकेदारी प्रथा पर कराया गया। आरोप है कि मनरेगा के तहत होने वाले कार्यों में स्थानीय मजदूरों को रोजगार देने के बजाय मशीनों का उपयोग किया गया, जो नियमों के विरुद्ध है। ग्रामीणों का कहना है कि निर्माण कार्य में जेसीबी और अन्य मशीनों का उपयोग किया गया, जबकि मनरेगा के तहत ऐसे कार्यों में मशीनों का प्रयोग प्रतिबंधित माना जाता है।

ग्रामीणों ने बताया कि कार्य स्थल पर तकनीकी अमला और जिम्मेदार अधिकारी मौजूद नहीं रहते, जिसके चलते निर्माण कार्य में मनमानी होती रही। उनका कहना है कि इसी लापरवाही का परिणाम है कि सूचना पटल तक सही तरीके से नहीं लगाया गया।

सबसे गंभीर बात यह सामने आई है कि चेकडेम निर्माण स्थल पर सूचना पटल को अलग से लगाने के बजाय सीधे चेकडेम के भीतर ही बना दिया गया। तस्वीर में भी यह स्पष्ट दिखाई दे रहा है कि सूचना पटल निर्माण कार्य पूरा होने के बाद तैयार किया गया है। जबकि नियमों के अनुसार निर्माण शुरू होने से पहले सूचना पटल लगाया जाना चाहिए, जिसमें कार्य की लागत, एजेंसी, स्वीकृत राशि, अवधि तथा अन्य जानकारी दर्ज रहती है।

ग्रामीणों का आरोप है कि सूचना पटल के नाम पर लगभग 5 हजार रुपये का बिल बनाया जाता है, लेकिन यहां अलग से पटल लगाने के बजाय उसे चेकडेम पर ही लिख दिया गया। इससे यह सवाल खड़ा हो रहा है कि आखिर सूचना पटल की राशि कहां खर्च हुई।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि निर्माण कार्य के दौरान अधिकारी और तकनीकी कर्मचारी नियमित रूप से स्थल पर मौजूद रहते, तो इस प्रकार की लापरवाही सामने नहीं आती। उनका आरोप है कि इतनी गंभीर अनियमितताओं के बावजूद अब तक किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं हुई है। शिकायतें केवल कागजों तक सीमित रह जाती हैं, जिसके कारण निर्माण कार्य कराने वालों के हौसले लगातार बुलंद होते जा रहे हैं।

ग्रामीणों ने मामले की निष्पक्ष जांच कराए जाने, मशीनों के उपयोग, ठेकेदारी प्रथा और सूचना पटल की राशि की जांच करने तथा दोषियों पर कार्रवाई किए जाने की मांग जल्द करने वाले है।

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