चेकडेम निर्माण में डस्ट युक्त गिट्टी का उपयोग, गुणवत्ता जांच की उठी मांग
स.लोहारा क्षेत्र में मनरेगा कार्यो में भारी अनियमितता, कार्यवाही की दरकार
कवर्धा XReporter News। कबीरधाम जिले के जनपद पंचायत स.लोहारा अंतर्गत ग्राम पंचायत – कु.दनिया में मनरेगा योजना के तहत बनाए जा रहे चेकडेम निर्माण कार्य (मालिक राम के खेत पास) में गंभीर अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि निर्माण कार्य में गुणवत्ता का बिल्कुल भी ध्यान नहीं रखा जा रहा है।
स्थल पर लगे सूचना बोर्ड के अनुसार चेकडेम निर्माण कार्य की स्वीकृत राशि लगभग 16.46 लाख रुपये है तथा कार्य प्रारंभ तिथि 27 जनवरी 2026 और पूर्णता तिथि 25 फरवरी 2026 अंकित है। इसके बावजूद निर्माण कार्य को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं।

डस्ट युक्त गिट्टी का उपयोग
ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण कार्य में डस्ट युक्त गिट्टी और खराब गुणवत्ता की रेत का उपयोग किया जा रहा है। उनका कहना है कि उपयोग किए जा रहे मटेरियल की लैब में परीक्षण (मटेरियल टेस्ट) कराया जाना अत्यंत आवश्यक है, जिससे यह पता चल सके कि निर्माण में प्रयुक्त सामग्री मानक के अनुरूप है या नहीं।

बिना आवश्यकता निर्माण
ग्रामीणों ने यह भी बताया कि जिस स्थान पर चेकडेम का निर्माण किया गया है, वहां इसकी कोई विशेष आवश्यकता नहीं थी। आसपास दूर-दूर तक कोई गांव भी नहीं है और पूरी तरह बेजान क्षेत्र में चेकडेम बना दिया गया है, जिससे शासन की राशि के दुरुपयोग की आशंका जताई जा रही है।

चेक डेम में सीपेज
स्थानीय लोगों का कहना है कि कुछ ही दिन पहले बने चेकडेम में पानी का सीपेज (रिसाव) शुरू हो गया है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि यह निर्माण कितने दिन तक मजबूती से टिक पाएगा और इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा?

ग्रामीणों ने जनपद पंचायत स.लोहारा की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि यहां आरईएस एसडीओ, जनपद सीईओ और PO जनपद तीनों अधिकारी प्रभारी रूप में कार्यरत हैं, जिसके कारण निर्माण कार्यों पर समुचित निगरानी नहीं हो पा रही है। इसका फायदा उठाकर ठेकेदार अपनी मनमानी से कार्य पूरा कर रहे हैं।
ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि तकनीकी सहायक और उप अभियंता भी कार्यस्थल पर उपस्थित रहकर काम नहीं कराते, जिसका खामियाजा अंततः आम लोगों को भुगतना पड़ता है। लोगों का कहना है कि इसी लापरवाही के कारण क्षेत्र में भ्रष्टाचार चरम सीमा तक पहुंच गया है।
ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि शासन-प्रशासन को कई बार शिकायत और समाचारों के माध्यम से अवगत कराया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। उनका कहना है कि शिकायतें केवल कागजों तक सीमित रह जाती हैं, जिससे ठेकेदार और अधिकारियों के हौसले बुलंद हो गए हैं।
ग्रामीणों ने कहा कि निर्माण कार्य की गुणवत्ता की निष्पक्ष जांच कराई जाए और उपयोग किए गए मटेरियल की टेस्ट रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए, ताकि सच्चाई सामने आ सके और शासन की राशि के दुरुपयोग पर रोक लगाई जा सके।


