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एक्स रिपोर्टर न्यूज । राजनांदगांव

जिले के धान खरीदी केंद्रों में सूखत के नाम से एक्स्ट्रा खरीदी कर किसानों की जेब में डाका डालने का खेल बदस्तूर जारी है। शासन के नियम के अनुसार एक बारदाने में 40 किलो धान भरा जा सकता है। उसमें बारदाने के वजन के बदले 500 से 600 ग्राम ज्यादा धान भरने की छूट है। इस छूट की आड़ में समिति वाले दो से तीन किलोग्राम तक एक्स्ट्रा धान भर रहे हैं। किसान आपत्ति करे तो कह दिया जाता है कि परिवहन समय पर नहीं होने से धान फड़ में पड़े रहने से सूखता है। जिसके बाद एक बोरे का वजन 40 किलो से कम हो जाता है। गौरतलब है कि बीते वर्षों में सोसायटी में अधिक तौल का मामला अफसरों ने भी पकड़ा था।

रोजाना लाखों रुपए का घालमेल
राजनांदगांव, मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी और खैरागढ़ जिले को मिलाकर कुल 174 केंद्र है, जहां प्रतिदिन दो से ढाई लाख क्विंटल धान खरीदी हो रही है। इस हिसाब से रोजाना हर केंद्र को मिलाकर लाखों रुपए का घालमेल हो रहा है। सूखत की आड़ में किसानों के धान से समिति वाले मुनाफा कमा रहे हैं। केंद्र में इलेक्ट्राॅनिक काटा नहीं होने का भी फायदा उठाया जाता है।

क्या है सूखत
सूखत यानि धान का सूखना है। एक बोरे में 40 किलो के हिसाब से धान भरा रहता है। जब कस्टम मिलिंग होती है तो ट्रक में लोड होने के बाद धान के तौल में जो अंतर आए वह सूखत की मात्रा होती है। नियमों के मुताबिक 40 किलो के बाद बारदाने के वजन के बराबर तक तौल सकते हैं। इससे ज्यादा नहीं तौल सकते हैं।

ऐसे समझे गणित
मोटा समर्थन मूल्य 2183 रुपए प्रति क्विंटल है। इस हिसाब से एक किलो धान की कीमत 21 रुपए पड़ती है। कर्मचारी दो से तीन किलो ज्यादा तौलते हैं। यानि एक बोरे में 42 से 63 रुपए का काटा मारा जाता है। एक सोसायटी में दिनभर में हजारों कट्टा धान खरीदा जाता है। इस हिसाब से सभी केंद्रों में लाखों रुपए का घपला किया जा रहा है।

ऐसे पकड़ाएगी गड़बड़ी
धान खरीदी केंद्रों के औचक निरीक्षण में पहुंचने वाले अफसरों को चाहिए कि वे पहले से तौल कर रखे धान को वापस तौलाए, जिससे भरती में गड़बड़ी का पता चल जाएगा, नियमत: कार्रवाई हुई तो सभी समिति प्रभारियों को सबक मिलेगी और वे अधिक धान की तौलाई नहीं करेंगे।

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