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राजनांदगांव। एक ओर छत्तीसगढ़ सरकार बेरोजगारों को नौकरी देने के नाम पर वाहवाही लूट रही है वहीं दूसरी ओर वर्षों से न्यूनतम मासिक तनख्वाह में सरकारी विभागों में काम करने वाले संविदा कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखाया जा रहा है। ऐसे ही एक मामला स्वास्थ्य विभाग मैं सामने आया है। यहां वर्ष 2018 यानी पिछले 5 वर्षों से कार्यरत 43 डीएमएफ संविदा कर्मचारियों को पिछले 31 मार्च 2023 को नौकरी से बाहर कर दिया गया है। इन कर्मचारियों में ज्यादातर महिलाएं हैं जो अपने परिवार का पालन पोषण कर रही है। एकाएक काम से निकाल दिए जाने के कारण यह सभी कर्मचारी आर्थिक दिक्कतों सामना कर रहे हैं।

*कलेक्टर से लेकर सीएम तक दिया आवेदन पर कार्रवाई शून्य*
गौरतलब है कि इस मामले को लेकर डीएमएफ कर्मचारियों ने कलेक्टर से लेकर सीएम भूपेश बघेल और पूर्व मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह, सांसद संतोष पांडे को भी ज्ञापन दे चुके हैं। लेकिन सभी जगह से केवल आश्वासन के कुछ नहीं मिला। कार्रवाई होना तो बहुत दूर की बात है। इस स्थिति में कर्मचारियों का भरोसा शासन प्रशासन की कार्यप्रणाली से उठने लगा है।

*कोरोना के दौरान इन्हीं कर्मचारियों ने किये थे महत्वपूर्ण कार्य*
काम से निकाले गए कर्मचारी आरती साहू, दुलेश रावटे, उमा भंडारी, अन्नपूर्णा मंडावी, संगीता नायक और पदमा वैष्णव सहित अन्य कर्मचारियों ने बताया कि डीएमएफ से रखे गए ज्यादातर कर्मचारी एएनएम और लैब टेक्नीशियन के पद पर कार्य कर रहे थे। कोरोना काल के दौरान डीएमएफ कर्मचारियों ने ही महत्वपूर्ण और फ्रंट वारियर्स के रूप में काम किया था। उन्हीं कर्मचारियों के भरोसे सघन कोविड-19 टेस्ट और टीकाकरण का अभियान चलाया गया था।

*दूरस्थ वनांचल और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में की ड्यूटी*
ज्यादातर डीएमएफ कर्मचारियों की ड्यूटी जिले के दूरस्थ वनांचल और नक्सल प्रभावित इलाकों में लगाई गई थी। जहां कर्मचारियों की संख्या आवश्यकता से कम रहते हुए भी डीएमएफ कर्मचारियों ने ईमानदारी और पूरी निष्ठा से कार्य किया। स्वास्थ्य सुविधा को लोगों तक पहुंचाने के लिए काफी कार्य किया। इसके बावजूद इन कर्मचारियों को सम्मान देने के बजाय बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है।

*छत्तीसगढ़ प्रदेश स्वास्थ्य कर्मचारी संघ के बैनर तले 12 मई को देंगे धरना*
सभी जगह से निराशा हाथ लगने के बाद डीएमएफ कर्मचारी छत्तीसगढ़ प्रदेश स्वास्थ्य कर्मचारी संघ के जिलाध्यक्ष सत्यम हुमने के पास पहुंचे। यहां कर्मचारियों ने श्री हुमने को पूरे मामले की जानकारी दी। विचार विमर्श के बाद सभी कर्मचारियों ने निर्णय लिया कि आगामी 12 मई को संघ के बैनर तले वह एक दिवसीय धरना प्रदर्शन करेंगे और शासन प्रशासन को नौकरी बहाली को लेकर ज्ञापन सौंपेंगे। श्री हुमने ने बताया कि सभी जिलों के पास डीएमएफ मद पर्याप्त रूप में रहता है इसके बावजूद कर्मचारियों को नौकरी से निकालना गलत है। इस मामले को लेकर संघ डीएमएफ कर्मचारियों के साथ है।

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