राजनांदगांव। स्वामी आत्मानंद स्कूलों को आरंभ कर गरीब बच्चों को अंग्रेजी स्कूलों में निःशुल्क देने का दावा करने वाले मुख्यमंत्री के पास उस स्कूल में गरीब बच्चों को पढ़ाने वाले कर्मचारियों को देने के लिए वेतन नहीं है। संविदा में कार्यरत कर्मचारियों को विगत दो माह से वेतन नहीं मिल रहा है और जिला शिक्षा अधिकारी कहते है कि उनको इस बात की जानकारी तक नहीं है, जबकि जिला समिति इस स्कूल को संचालित कर रही है और वे इस जिला समिति के सचिव है, और कलेक्टर अध्यक्ष है।
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की महत्वाकांक्षी योजना स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम विद्यालय के शिक्षकों को दो महीने से वेतन नहीं मिल पाया है, वहीं दूसरी ओर उसी स्कूल में कार्यरत प्रतिनियुक्ति पर कार्यरत सरकारी कर्मचारियों को प्रतिमाह वेतन दिया जा रहा है, जबकि दो कर्मचारियों को समिति वेतन दे रही है। दोनों कर्मचारियों का वेतन एक साथ बनता और स्वीकृत होता है, तो फिर ऐसा भेदभाव क्यों और किसके कहने पर हो रहा है?
छत्तीसगढ़ पैरेंट्स एसोसियेशन के प्रदेश अध्यक्ष क्रिष्टोफर पॉल का कहना है कि, इन स्कूलों के शिक्षकों को भी रोड़ में उतर कर आंदोलन करना चाहिए, तब मुख्यमंत्री और अधिकारियों की नींद खुलेगी। झूठी वाहवाही लुट रहे है, मुख्यमंत्री के ड्रीम प्रोजेक्ट आत्मानंद स्कूल में शिक्षकों का हाल बेहाल है। कर्मचारी अपने लंबित गृह ऋण किस्त, बच्चों का स्कूल फीस, दैनिक राशन व्यय, मकान किराया नहीं दे पा रहे है। वेतन नहीं मिलने से शिक्षकों के सामने भुखमरी की स्थिति उत्पन्न हो गई है। जनवरी और फरवरी का वेतन शिक्षकों को नहीं मिला है। कभी भी समय पर शिक्षकों का भुगतान नहीं होता है। इस कारण शिक्षक मानसिक तनाव व आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं।


