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हॉस्टल से अधीक्षक रहते है नदारद, छात्रों से कराया जाता है काम, जिम्मेदार अधिकारी मौन

कवर्धा। राज्य सरकार जहां एक ओर कई योजनाओं से लोगो को प्रभावित कर रहे है आम नागरिकों के लिए नई नई योजना से लोगो का मन मोह रहे है लेकिन क्या जनता तक इस सरकार की पूरे योजनाओं का लाभ आमजन तक पहुंच रहा है की नही इसका सुध लेने वाला कोई नही है। सरकार द्वारा योजना तो लागू कर दिया जाता है पर उस योजना का संपूर्ण लाभ आमजन तक पहुंच रहा है कि नही इसके बारे में अगर पता किया जाए तो पता चलेगा कि योजना का लाभ लोगो को पूरा मिलता है कि नही।

ऐसे ही कई प्रकार के योजना आदिम जाति विकास विभाग में भी है जिसको देख लोग योजना का लाभ मिल सके करके आते है लेकिन विभाग द्वारा बड़ी लापरवाही सामने आई है बता दे कि आदिमजाति विकास विभाग में हॉस्टल अधीक्षकों की मनमानी थमने का नाम नही ले रहा है,कभी छात्रों को भोजन के नाम पर तो कभी सुविधाओं के नाम पर तरसाया जा रहा है और जिम्मेदार अधिकारी मूकदर्शक बने बैठे है जो समझ से परे है। जिसका सुध लेने वाला भी कोई नही है।

बतादे की कुछ ऐसा ही मामला कबीरधाम जिले के अनुसूचित जाति प्री मैट्रिक छात्रावास पांडातराई में देखने को मिल रहा है जहाँ हॉस्टल अधीक्षक नदारत रहते है वही रसोईयो के साथ मे छात्र सब्जी काटते नजर आ रहे है वही दो अन्य भृत्य हॉस्टल से गायब थे, सुबह 10 बजे तक भोजन भी नही बना रहता,इतना ही नही छात्रों को नास्ता भी समय पर नही मिलता। यह सब स्थिति जब हॉस्टल के छात्र से पूछा गया तो उन्होंने बताया की हॉस्टल में अधीक्षक नही रहते हमेशा लेट में आते है और सुबह नास्ता भी नही मिलता। 1 बजे व शाम को सिर्फ भोजन मिलता है। इतना ही नही यहाँ रहने वाले अनुसूचित जाति वर्ग के छात्रों को टूटे पलंग व फटे गद्दे में सोना पड़ता है। ऐसे ही जिले के कई छात्रावास की है जहां छात्रों को अपने मूलभूत सुविधाएं नही मिल पा रही है। इससे साफ जाहिर होता है की आदिमजाति विकास विभाग के जिम्मेदार अधिकारी अपने जिम्मेदारी के प्रति कितना सजग है।

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