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कवर्धा। कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी रमेश कुमार शर्मा ने पुलिस अधीक्षक, कबीरधाम के प्रतिवेदन तथा कानून व्यवस्था के संबंध में सभी पहलुओं एवं तथ्यों पर विचारोपरान्त पर्याप्त साक्ष्यों के आधार पर स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रभावित होने वाले व्यक्तियों की सूचना की तामिली एवं सुने जाने के लिए पर्याप्त समय न होने के कारण एकपक्षीय रूप से दण्ड प्रक्रिया संहिता 1973 की धारा 144 की उपधारा (2) में प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए प्रतिबंधात्मक निषेधाज्ञा जारी किया है। जारी आदेश के अनुसार जिले के भीतर अन्य राज्य, जिलों से आकर गुड फैक्ट्री कारखानों, दुकानों, व्यवसायिक प्रतिष्ठानों में कार्य करने वाले कर्मचारियों, नौकरों, सेवक, सेविकाओं की सूचना संबंधित व्यवसायिक प्रतिष्ठान के मालिकों द्वारा निकटतम थाने में सत्यापन कराने। जिले के भीतर समस्त मकान मालिकों द्वारा अपने किरायेदारों तथा व्यापारिक संस्थानों की जानकारी संबंधित थाना प्रभारी को सत्यापन के लिए उपलब्ध कराने आदेश जारी किया है। यह आदेश 31 दिसंबर 2021 से 27 फरवरी 2022 तक प्रभावशील होगा तथा इस आदेश का उल्लंघन करने पर भारतीय दण्ड संहिता की धारा 188 एवं अन्य विधिक प्रावधानों के तहत इस दण्डनीय होगा ।
जारी आदेश में बताया गया है कि व्यापार एवं व्यवसाय करने के लिये बहुत से व्यक्ति जिले के बाहर एवं विभिन्न प्रदेशों से कबीरधाम जिले में आ रहे हैं, जिनके साथ में विभिन्न प्रकार के आपराधिक किस्म के व्यक्ति भी आ रहे हैं। इसी प्रकार जिले के अन्य क्षेत्रों में भी गन्ना का उत्पादन एवं गुड फैक्ट्री में कार्य करने के लिये मजदूर एवं कारीगर अन्य जिले व विभिन्न प्रदेशों से पहुँच रहे हैं। जिनके द्वारा पूर्व में बहुत से आपराधिक कृत्य करते हुये गंभीर अपराध घटित किया गया है।
जारी आदेश में बताया गया है कि कबीरधाम जिले में असामाजिक तत्व शहर एवं निकटवती नगरीय क्षेत्रों नगर बाह्य क्षेत्रों एवं फैक्ट्रियों में अपराध घटित करने के नियत से स्वयं को आवासीय क्षेत्र में छिपाने का प्रयास करने एवं नगर की शांति व्यवस्था को खतरा होने के साथ-साथ मानव जीवन और लोक संपत्ति की क्षति की आशंका व भय का वातावरण बना रहता है । शहर, ग्रामीण क्षेत्रों के अधिकांश व्यापारिक प्रतिष्ठान के मालिक, मकान मालिक उनके किरायेदारों, घरेलू नौकरों, व्यापारिक संस्थान में नियोजित सेवक, सेविका के संबंध में सत्यापन के लिए आवश्यक संसूचना क्षेत्र के थाना प्रभारियों को नहीं देते हैं. जिसके फलस्वरूप घटित अपराध तथा अपराधियों की गतिविधियां व षडयंत्र पर नियंत्रण रखने में कठिनाई उत्पन्न होती है। जिसके कारण जिले के भीतर लोक न्यूसेंस पैदा किया जा रहा है।

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