छुरिया से सूरज लहरे की रिपोर्ट
छुरिया– क्षेत्र के लिए बेहद गर्व का विषय है की क्षेत्र में तीरंदाज़ी खेल का वर्चस्व नहीं है तथा इस खेल को मुलभूत सुविधाओं कि कमी होने के बावजूद भी इस खेल में अपने आपको निखारना और बड़े बड़े खिताबो में भाग लेकर के उत्कृष्ट प्रदर्शन करना निश्चित ही गौरव का विषय हैं।

विगत दिनो संस्कारधानी राजनांदगांव में तीरंदाज़ी संघ तथा पुलिस विभाग के तत्वावधान में जिलास्तरीय तीरंदाज़ी खेल का आयोजन किया गया जिसमें भी आदिवासी समाज कि छात्रा निलम कोडा़पे ने रिकर राउंड गल्स में प्रथम स्थान प्राप्त किया।
तीरंदाजी के नेशनल गेम में भी किया है राजनांदगांव को गौरान्वित
नीलम कोड़ापे नेशनल गेम खेलने भुनेशवर जा चुकी है। जहां पर उत्कृष्ट प्रदर्शन रहा है। दो बार राज्यस्तरीय खेल और तीन बार नेशनल तीरदांजी खेम खेलने अन्य राज्यों में जाकर जिला का नाम रोशन कर चुकी है। जो कि एक आदिवासी गरीब परिवार की लड़की है जो छुरिया विकासखंड के अंतिम छोर महाराष्ट्र सीमावर्ती ग्राम पंचायत मरकाकसा के आश्रित ग्राम कटेंगाटोला की है।
रोजी मजदूरी ही नीलम के परिवार का सहारा
निलम कोडा़पे ने बताया कि कई बार घर में अनेक प्रकार की संकटे आई फिर भी उनकी मां प्रमिला बाई कोडा़पे पिता देवीलाल कोडा़पे ने हमेशा पढाई के साथ साथ खेल खेलने से कभी मना नहीं किया और उनके परिवार ने हर जरूरते रोजी मंजुरी करके पुरी की और वह परिवार वालो के कहने पर राजनांदगांव में रहकर पढाई कि और जमकर रूचि के अनुरूप तीरंदाज़ी खेल में जमकर पसीना बहाया निलम ने इस उपलब्धि के पीछे परिवार कि सोच और मनोबल को सहारा और निलम ने अपने कोच राहुल साहू एवं खोमेंद्र साहू का भी धन्यवाद कहा उन्ही के मार्गदर्शन में यह कामयाबी हासिल की है।
नक्सल प्राभावित और आर्थिक संकट के बीच संघर्ष करती कटेंगा की नीलम, आजतक कोई जनप्रनिधि पूछने भी नही आया
नक्सल प्रभावित और आर्थिक संकट के बावजूद भी नीलम हार नही मानी और लगातार संघर्ष कर रही है। तीरंदाजी में इनके उत्कृष्ट प्रदर्शन के बावजूद भी आजतक क्षेत्र की कोई जनप्रनिधि पूछने भी नही आया। एक तरफ सरकार खेलों को बढ़ाने के लिए तरह तरह के खेलों का आयोजन कर पैसा पानी की तरह बहा रही है। लेकिन दूसरी तरफ जिन्होंने जिले और राज्य का मान बढ़ा रही है ऐसे प्रतिभावान खीलाड़ी अपने क्षेत्र में गुमनाम बनकर रह गयी है। सरकार को चाहिए कि ऐसे खिलाड़ियों का हर सम्भव मदद करे।


